चर्च अथवा मस्जिदका शासकीयकरण (सरकारीकरण) विश्वमें कहीं नहीं होता; परन्तु अध्यात्म सम्बन्धी विषयके विश्वके केन्द्र भारतमें, शासनकर्ता देवालय (मन्दिर) हडपते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)
बाह्य रंगभूषा (मेक-अप) अन्योंको आकर्षित करती है; किन्तु आंतरिक रंगभूषा, स्वभावदोष और अहंका निर्मूलनकर ईश्वरको आकर्षित करती है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात)
गुरुका सुननेकी शिष्यको आदत हो गई, तो ही देवताने कुछ बताया तो शिष्य सुनता है । ऐसे शिष्यको ही देवता दर्शन देते हैं और इसलिए बुद्धिवादियोंको वह दर्शन नहीं देते ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
साधनाके कारण ‘ईश्वर प्राप्ति हो’, ऐसा लगनेपर पृथ्वीपरकी किसी भी वस्तुकी अपेक्षा नहीं रहती; अतः किसीके प्रति जलन, मत्सर अथवा द्वेष नहीं होता, उसीप्रकार अन्योंसे दूरी, विवाद नहीं होते । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
कुछ संस्थाओंके कार्यकर्ता बोलते हैं कि विधायक, मंत्रीकी पहचानके कारण हमारे कार्य होते हैं ।’ इसके विपरीत सनातनके साधक बोलते हैं, ‘ईश्वरका आशीर्वाद प्राप्त है, इसलिए हमारे कार्य होते हैं । प्रत्यक्षमें सनातनका कार्य अन्य अनेक संस्थाओंकी अपेक्षा अधिक है ।’ – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
किसी राजनैतिक दल अथवा बडे संगठनमें कोई पद मिलनेकी अपेक्षा ईश्वरका भक्त होना अच्छा है ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
सात्त्विक चित्रकार देवताके सात्त्विक चित्र निकालते हैं । इसके विपरीत म.फि. हुसैन जैसे तामसिक चित्रकार देवताओंके नग्न एवं तामसिक चित्र निकालते हैं । इसमें आश्चर्यकी बात यह है कि इस संदर्भमें मृतप्राय हिन्दुओंने अनेक वर्षोंतक कुछ भी नहीं किया, जिस कारण अगली पीढीपर भी वैसे ही संस्कार हुए हैं ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत […]
कहां बंगालमें साम्यवादियों और मुसलमानोंकी तुष्टिकरण (चापलूसी) करनेवाले वर्तमानके हिन्दू, तो कहां हिन्दू धर्मको विश्वमें सर्वोच्च स्थान दिलवानेवाले बंगालके ही रामकृष्ण परमहंसके के शिष्य, विवेकानंद ! । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
विवाह उपरान्त ससुराल जानेपर कन्याओंके मनपर थोडा तनाव रहता है; क्योंकि ससुरालके व्यक्ति, वहांकी कार्यपद्धति इत्यादि, सब उसके लिए नूतन होता है । तनाव न लगे, इस हेतु जैसे किसी कार्यालयमें चाकरी (नौकरी) लगनेपर हम वहांकी सब पद्धति ज्ञात करते हैं, उसी प्रकार ससुराल जाकर वहांकी कार्यपद्धति ज्ञात करनी है, ऐसा दृष्टिकोण रखनेपर उन्हें तनाव […]
सकाम प्रार्थनासे महत्त्वपूर्ण साधना ! इसके कारण निम्नलिखित हैं – १. प्रार्थनासे प्रारब्ध शून्य नहीं होता, मात्र साधनासे होता है । २. प्रार्थनामें स्वेच्छा होती है तथा साधनासे स्वेच्छाका नाश करना होता है । ‘साधना योग्य हो’, ऐसी प्रार्थना करनेकी अपेक्षा वह समय साधनाको देना, उदा. नामजप अथवा सेवाके लिए देना, महत्त्वपूर्ण है । – […]