सर्वोपरि श्रेष्ठ दान जो आप किसी मनुष्यको दे सकते हैं, विद्या व ज्ञानका दान है। – स्वामी रामतीर्थ
निष्काम कर्म ईश्वरको ऋणी बना देता है और ईश्वर उसको सूद सहित वापस करनेके लिए बाध्य हो जाता है। – स्वामी रामतीर्थ
अग्नि उसीको जलाती है जो उसके पास जाता है; परन्तु क्रोधाग्नि सारे कुटुम्बको जला डालती है। – संत तिरुवल्लुवर
ज्ञाताज्ञात पाप ही अंत:करणकी मलिनता है । जब तक अंत:करण मलरहित, पापरहित नहीं होगा, तब तक वास्तविक दृष्टिका उदय नहीं होगा । – आदिगुरु शंकराचार्य
दूसरोंमें दोष न निकालना, दूसरोंको उतना उन दोषोंसे नहीं बचाता जितना अपनेको बचाता है । – स्वामी रामतीर्थ
समय आए बिना वज्रपात होनेपर भी मृत्यु नहीं होती और समय आ जानेपर पुष्प भी प्राणीके प्राण हर लेता है । – कल्हण
यदि तुमने आसक्तिका राक्षस नष्ट कर दिया तो इच्छित वस्तुएं तुम्हारी पूजा करने लगेंगीं । – स्वामी रामतीर्थ
निकृष्ट व्यक्ति बाधाओंके भयसे कार्य आरम्भ ही नहीं करते, मध्यम प्रकृतिवाले कार्यका प्रारम्भ तो कर देते हैं; किन्तु विघ्न उपस्थित होनेपर उसे छोड देते हैं । इसके विपरीत, उत्तम प्रकृतिके व्यक्ति बार-बार विघ्नोंके आनेपर भी कार्यको एक बार आरम्भ कर देनेके पश्चात उसे कभी नहीं छोडते। – भतृहरि