अध्यात्म

पाश्चात्योंकी मानवतावादसे भी श्रेष्ठ है, भारतीय संस्कृतिका अध्यात्म !


जुलाई २०१३ में मैं जर्मनी गयी थी, वहां वृन्दावनके एक पण्डितजी उस देशकी मानवतावादी दृष्टिकोणकी भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे थे । इसी क्रममें उन्होंने एक प्रसंग बताया । उन्होंने कहा “यहांके जैसा मानवतावाद पूरे विश्वमें कहीं नहीं है” और उन्होंने एक घटना सुनाई जो इस प्रकार थी – “मैं जिस देवालयका (मन्दिरका) पूजारी हूं, उसका […]

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श्री रामचरितमानस अनुसार नामजपकी महिमा


कलियुगमें जितने भी साधनामार्ग है उसमें सबसे सहज मार्ग है भक्तियोग, और भक्तियोग अंतर्गत नामसंकीर्तनयोग अनुसार साधना करना इस युगकी सर्वश्रेष्ट साधनामार्ग है | संत तुलसीदासने श्री रामचरितमानसमें नामके महिमाका गुणगान किया है | संत जिस देवी या देवताके स्वरूपकी आराधना कर आध्यात्मिक प्रगति कर आत्मज्ञानी बनते हैं उसी आराध्यके नामकी गुणगान कर उनके प्रति […]

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अलौकिक प्रेम अर्थात प्रीति :


अलौकिक प्रेम अर्थात प्रीति : ईश्वर एवं भक्तका प्रेम अलौकिक होता है | यद्यपि सकाम भक्तकी ईश्वरसे कुछ अपेक्षा होती है परंतु निष्काम भक्त मात्र ईश्वरसे प्रेम करने हेतु प्रेम करता है, प्रेम करना उसका मूल धर्म होता है और ऐसे साधकको सर्वश्रेष्ठ भक्त कहा गया है | भगवान श्रीकृष्ण ने कहा भी है | […]

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सत्संगके लाभ


१. सत्संग है धर्म और अध्यात्शास्त्रकी जानकारीप्राप्त करनेका महत्त्वपूर्ण माध्यम सत्संगमें जानेपर हमें धर्म और अध्यात्मकी जानकारी मिलती है जो जानकारी हमें अन्यत्र कहीं नहीं मिलती | हमारे देशमें भी धर्मनिरपेक्षताकी आडमें हमें धर्मशिक्षण विद्यालय या महाविद्यालयमें नहीं दिया जाता है; फलस्वरूप हम व्यावहारिक रूपसे कितने भी शिक्षित हों, अध्यात्ममें धर्मशिक्षणके अभावमें हम अत्यल्प जानकार […]

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नामजपका प्रवास वैखरीसे मध्यमामें कैसे करें ?


मनमें नामजप करना, बोलकर नामजप करनेसे अधिक श्रेष्ठ है | जब नामजप ऊंचे स्वरमें एवं प्रयत्नपूर्वक किया जाता है, उसे वैखरी वाणीका नामजप कहते हैं | वैखरीके नामजपसे प्राथमिक अवस्थाके साधकके लिए जपपर ध्यान एकाग्र करना सुलभ होता है | प्राणायामके भी लाभ प्राप्त होते हैं | ऐसे जपसे समष्टिको भी लाभ होता है अर्थात […]

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साधना, साधक एवं उन्नतसे सम्बन्धित प्रसार संस्मरण (भाग – ६)


ख्रिस्ताब्द २०१२ में पटनामें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीने फेसबुकके माध्यमसे मुझसे अपनी शंकाओंके समाधान हेतु सम्पर्क किया और इस प्रकार वे ‘उपासना’से जुड गए | जब मैं झारखण्डमें अपने गांव लौटती थी तो पटनामें उनके घर रुकना होता था, मैं सम्भवतः पांच-छः बार उनके घरमें रुकी होउंगी । दोनों पति-पत्नीको अपने अधिकारी होनेका अत्यधिक अहं […]

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दिवसकी शुभारम्भ कैसे करें ?


१. सूर्योदयसे पूर्व उठनेका प्रयास करें | वैज्ञानिकोंने शोधमें पाया है कि सूर्योदयसे पहले उठनेवाले, सूर्योदयके पश्चात उठनेवालेकी अपेक्षा अधिक स्वस्थ एवं दीर्घायु होते हैं | सुबह उठकर नामजप, ध्यान आदि करनेसे हमें अधिक लाभ मिलता क्योंकि ब्रह्म मुहूर्तमें योगी, ऋषि, तपस्वी साधनारत रहते हैं जिससे ब्रह्माण्डकी सात्त्विकता बढ़ जाता है और उससे उस कालमें […]

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साधक किसे कहते हैं ?


अपने घर एवं व्यवसायको संभालते हुए साधना करनेवाले ‘उपासना’ के दिल्लीके साधक दंपति श्री एवं श्रीमति गोयलसे अन्य गृहस्थ साधक बोध लें – सर्वप्रथम श्रीमति गोयलके विषयमें मैंने जो विशेष साधकत्वके गुण परिलक्षित होते हुए दिखाई दिये वह बताती हूं – सेवा परिपूर्ण करना श्रीमती गोयलकी एक विशेषता है सेवाको परिपूर्णतासे करना | अगस्त २०१२ […]

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हमारे श्रीगुरुद्वारा प्रतिपादित स्तरानुसार साधनाकी प्रचीति देनेवला एक और प्रसंग !


दिनांक 29 जनवरी 2013 के दिन  महाकुंभमें एक सुप्रसिद्ध संतसे आशीर्वाद लेने गयी, उन्हें देखते ही समझमें आ गया कि वे एक उन्नत हैं, संत नहीं (उन्नतों का आध्यात्मिक स्तर 50 से 69% के मध्य होता है  और संत का आध्यात्मिक स्तर 70% से अधिक होता है ) | मैंने सूक्ष्मसे उनका आध्यात्मिक स्तर निकाला […]

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पूज्य चेतनदासजी महाराजसे सीखनेके लिए मिले मुद्दे


उपासनाके द्वितीय स्थापना दिवस(अर्थात 3 और 4 जनवरी 2013 को ) कार्यक्रममें एक संत पूज्य चेतन दासजी महाराज आए थे | वे देवराहा बाबा एक शिष्य हैं | उनके आनेके पश्चात सम्पूर्ण वातावरण चैतन्यमय हो गया | प्रस्तुत हैं पूज्य चेतनदासजी महाराजसे सीखने…के लिए मिले मुद्दे : १. ईश्वरप्राप्तिकी उनकी तड़प और साधनाके प्रति उनकी […]

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