अध्यात्म

बहिर्मुखी जीव कृतघ्न और अंतर्मुखी जीव कृतज्ञ होता है !


बहिर्मुखी जीव कृतघ्न होता है और अंतर्मुखी जीव कृतज्ञ होता है ! 

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श्वाश्वत सुखप्राप्तिका एक ही माध्यम है धर्मपालन एवं सातत्यसे साधना करना !


धर्म व साधानके अभावमें आजका मनष्य आनंद किसे कहता है उसकी अनुभूति नहीं ले पाता है इसलिए आजकल इतने सारे हंसोड कार्यक्रम होने लगे हैं ! ऐसे कार्यक्रममें जैसे एक व्यक्तिको श्मशानकी किसी मित्र या शुभचिंतककी मृतदेहको जलते हुए देखकर क्षणिक….

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मानसिक कष्ट (मनोरोग) होनेपर क्या करें ? (भाग-१)


आज समाजके अनेक लोगोंको मध्यमसे तीव्र स्तरका मानसिक कष्ट है | इसका मूल कारण साधना और धर्माचरणके अभावके कारण बढा हुआ रज-तम ही है | इस लेख शृंखलामें इस कष्टसे सम्बन्धित कुछ दृष्टिकोण देनाका एक तुच्छसा प्रयास करने जा रही हूं……..

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यदि हम श्रम नहीं करेंगे तो क्या हमारे भाग्यसे धन आ जायेगा ?


एक व्यक्तिने कहा कि यदि हम श्रम नहीं करेंगे तो क्या हमारे भाग्यसे धन आ जायेगा ? उत्तर बडा सरल है भाग्यमें धन हो तो श्रमकी दिशा और दशा भी योग्य होती है अन्यथा सभी श्रम करनेवाले धनवान होते ! 

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सन्तोंके दिए हुए नामजप और उपाय करनेमें श्रद्धा और भावका महत्त्व !


कुछ लोगोंको सन्तोंके दिए हुए नामजप और उपायपर विश्वास नहीं होता है इसलिए उन्हें उनकेद्वारा दिए हुए जप एवं उपायसे अपेक्षित लाभ नहीं होता है ! ध्यान रहे अध्यात्ममें श्रद्धा और भावका ही सर्वाधिक महत्त्व होता है !

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अपने सिरहाने भ्रमणभाष (मोबाइल) लेकर नहीं सोना चाहिए !


जितने भी इलेक्ट्रोनिक उपकरण हैं उनसे हमारे तमोगुणी लहरियोंका प्रक्षेपण होता है | रात्रिमें तो वैसे ही तमोगुणका….

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विवेकसे ही उचित अनुचितका बोध!


बुद्धिका रूपांतरण विवेकमें होनेसे धर्म, अधर्म, पाप, पुण्य, उचित अनुचितका बोध होता है | आज अधिकांश लोगोंमें विवेकके जागृत न होनेसे वे व्यावहारिक दृष्टिसे बुद्धिमान होते हुए भी योग्य निर्णय लेनेमें असमर्थ होते हैं और अनुचित निर्णय लेनेसे उनका आध्यात्मिक पतन होता है या पापकर्म निर्माण होता है ! ध्यान रहे भारतमें ९५ % भ्रष्टाचार […]

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खरा साधकत्व जीवनमें विषम स्थिति आनेपर ही ज्ञात होता है!


अध्यात्मके सिद्धान्तोंको अपने जीवनमें उतारनेपर, वृद्धावस्था, अपने निकटके परिजनकी अकाल मृत्यु एवं महामारीमें भी मन स्थिर और शांत रहता है, यही अध्यात्म व साधनाका महत्त्व है । अपने मनके अनुसार  साधना करनेसे हम स्वयंको साधक या भक्त समझ सकते हैं; किन्तु खरा साधकत्व जब जीवनमें विषम स्थिति आती है तो ही ज्ञात होता है और […]

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आई.वी.एफसे उत्पन्न सन्तानका आध्यात्मिक स्तर कैसा होता है ?

आई.वी.एफसे उत्पन्न सन्तानका आध्यात्मिक स्तर कैसा होता है ? आईवीएफसे सन्तान प्राप्त करनी चाहिए ? – श्री कमलकिशोर शर्मा, बीकानेर, राजस्थान


सर्वप्रथम यह जान लें कि आई.वी.एफ.से उत्पन होनेवाले शिशुओंका और आध्यात्मिक स्तरका कोई सम्बन्ध नहीं है । उच्च स्तरकी आध्यात्मिक जीवात्माएं सामान्यत: सात्त्विक माता-पिताके घर जन्म लेते हैं……..

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सन्तान प्राप्तिके लिए क्या उपाय कर सकते हैं ?

एक व्यक्तिने स्वस्थ एवं सात्त्विक सन्तान हेतु माता-पिता ने कौनसे प्रयत्न करने चाहिए ?, इस सत्संग अंतर्गत यू-ट्यूबपर एक प्रश्न किया है, यदि कोई दम्पती दस वर्षोंसे निःसंतान है तो वे सन्तान प्राप्तिके लिए क्या उपाय कर सकते हैं ?


यदि दोनों पति-पत्नीको शारीरिक दृष्टिसे कोई कष्ट न हो एवं तब भी उन्हें सन्तान नहीं हो रहा हो तो वह कष्ट आध्यात्मिक कारणोंसे हो सकता है ! आध्यात्मिक स्तरके कष्टके अनेक कारण हो सकते हैं, जैसे………….

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