अध्यात्म

आर्थिक संकटको दूर करनेके कुछ उपाय (भाग-५)


स्वयं या पूर्वजोंद्वारा अधर्मसे अर्जित धन भी आर्थिक संकटका कारण बनता है । आजकल अनेक लोग येन-केन प्रकारेण धनका संचय करते हैं । उन्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करनेसे वे अपनी भावी पीढीके लिए सुख-शान्तिकी व्यवस्था कर रहे हैं; किन्तु ऐसा है नहीं…..

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आर्थिक संकटको दूर करनेके कुछ उपाय (भाग-४)


हिन्दू धर्ममें स्त्रीको गृह लक्ष्मी कहते हैं | धर्मप्रसारकी सेवाके मध्य देश-विदेशमें अनेक लोगोंके घरपर रहना हुआ है, इसी क्रममें मैंने पाया कि कुछ पुरुषोंके भाग्यमें धन मात्र उनकी पत्नीके भाग्य एवं सद्वर्तनके कारण आया; और…….

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आर्थिक संकटको दूर करनेके कुछ उपाय (भाग-३)


हमारे घरके वास्तुको अनिष्ट शक्तियोंसे रक्षण करनेमें भी कुछ सात्त्विक पौधोंका भी बहुत अधिक महत्त्व होता है | ये पौधे  दैवी तत्त्वको आकृष्ट कर हमारे घरमें सुख और समृद्धि लाते हैं ! ऐसा ही एक औषधीय गुणोंवाला दिव्य पुष्पका पौधा है अपराजिता….

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आर्थिक संकटको दूर करनेके कुछ उपाय (भाग-१)


आज अनेक लोगोंको आर्थिक संकट है, वे इस विषयपर समय-समयपर मुझसे पूछते हैं कि इसका निवारण कैसे करें ? ; इसलिए इस लेख शृंखलाके माध्यमसे आपको इस सम्बन्धमें कुछ तथ्य बतानेका प्रयास करेंगे, जो सम्भव हो, उनका पालन करनेका प्रयास करें, आपको ईश्वर निश्चित ही इसका शुभ परिणाम देंगे …….

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बहिर्मुखी जीव कृतघ्न और अंतर्मुखी जीव कृतज्ञ होता है !


बहिर्मुखी जीव कृतघ्न होता है और अंतर्मुखी जीव कृतज्ञ होता है ! 

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अपने बच्चोंको सुखी देखना चाहते हैं तो अपने धनको शुद्ध रखें !


मैंने अपने शोधमें पाया है कि भ्रष्ट लोगोंके बच्चे बहुत धन होनेपर भी सुखी नहीं होते हैं और अधर्मके कारण उनके धन अशुद्ध हो जाते हैं और उससे उनके बच्चोंके संस्कार खराब हो जाते हैं या उन्हें भिन्न प्रकारके कष्ट हो जाते हैं….

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श्वाश्वत सुखप्राप्तिका एक ही माध्यम है धर्मपालन एवं सातत्यसे साधना करना !


धर्म व साधानके अभावमें आजका मनष्य आनंद किसे कहता है उसकी अनुभूति नहीं ले पाता है इसलिए आजकल इतने सारे हंसोड कार्यक्रम होने लगे हैं ! ऐसे कार्यक्रममें जैसे एक व्यक्तिको श्मशानकी किसी मित्र या शुभचिंतककी मृतदेहको जलते हुए देखकर क्षणिक….

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मानसिक कष्ट (मनोरोग) होनेपर क्या करें ? (भाग-१)


आज समाजके अनेक लोगोंको मध्यमसे तीव्र स्तरका मानसिक कष्ट है | इसका मूल कारण साधना और धर्माचरणके अभावके कारण बढा हुआ रज-तम ही है | इस लेख शृंखलामें इस कष्टसे सम्बन्धित कुछ दृष्टिकोण देनाका एक तुच्छसा प्रयास करने जा रही हूं……..

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यदि हम श्रम नहीं करेंगे तो क्या हमारे भाग्यसे धन आ जायेगा ?


एक व्यक्तिने कहा कि यदि हम श्रम नहीं करेंगे तो क्या हमारे भाग्यसे धन आ जायेगा ? उत्तर बडा सरल है भाग्यमें धन हो तो श्रमकी दिशा और दशा भी योग्य होती है अन्यथा सभी श्रम करनेवाले धनवान होते ! 

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सन्तोंके दिए हुए नामजप और उपाय करनेमें श्रद्धा और भावका महत्त्व !


कुछ लोगोंको सन्तोंके दिए हुए नामजप और उपायपर विश्वास नहीं होता है इसलिए उन्हें उनकेद्वारा दिए हुए जप एवं उपायसे अपेक्षित लाभ नहीं होता है ! ध्यान रहे अध्यात्ममें श्रद्धा और भावका ही सर्वाधिक महत्त्व होता है !

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