विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) मांस उत्पादोंको ‘एस्बेस्टस’ और ‘सिगरेट’की भांति कैंसरजनक (कारसेनोजिनिक) तत्वोंमें वर्गीकृत करता है । आपको बता दें, विदेशोंमें…..
आयुर्वेदकी परिभाषा एवं व्याख्यासे ही यह शास्त्र कितना वृहद एवं मनुष्य मात्रके लिए कल्याणकारी है ?, यह ज्ञात होता है । आयुर्वेद विश्वमें विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययनके…..
आप सभीने बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लूका नाम सुना होगा । यह रोग मुर्गे और सुअरोंके माध्यम मनुष्योंतक पहुंचती है । यह रोग हमारे शरीर तक तभी पहुंचती है जब हम इस रोगसे ग्रस्त जीवको….
आयुर्वेदाचार्य चरकके अनुसार यदि कोई पशु अपने प्राकृतिक वातावरणमें नहीं रह रहा है या उस भोगौलिक क्षेत्रका मूल निवासी नहीं है या किसी किसी ऐसे वातावरणमें…..
आजकल पाश्चात्य भोजनालयोंमें भोजनके साथ शीतपेय परोसनेका प्रचलन है और जो भारतीय विदेशियोंको नेत्र मूंदकर अनुकरण करनेवाले हैं, वे उसे बडे इतराकर सेवन करते हैं; किन्तु ऐसा नहीं करना चाहिए । वस्तुत: भोजनके समय किसी भी प्रकारका, सामान्य तापमानसे नीचेका कोई भी शीतल पेय, विशेषकर कृत्रिम शीतल पेय पदार्थ कदापि न पीएं, इससे जठराग्नि बुझ […]
पीलियामें करेलेको पीसकर निकाले रसको दिनमें दो बार पिलाना चाहिए । यकृतसे सम्बन्धित रोगोंके लिए तो करेला रामबाण औषधि है । जलोदर रोग होनेपर आधा कप जलमें २ चम्मच …..
करेलेमें ‘मैग्नीशियम’ और ‘फॉस्फोरस’ जैसे तत्त्व होते हैं, जो पथरी बननेसे रोकते हैं । पथरी रोगियोंको दो करेलेका रस पीने और करेलेका शाक खानेसे लाभ मिलता है । इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है…..
यदि आप करेलेका सेवन नहीं करना चाहते हैं तो इसका मुखलेप (फेस-पैक) लगाकर त्वचाको कान्तियुक्त बना सकते हैं । करेलेमें ‘विटामिन-सी’, लोहा, ‘बिटा-केराटिन’…..
करेलेकी न केवल पत्तियां, वरन करेला भी चर्म रोगमें अत्यधिक लाभप्रद है । यह त्वचाके रोगोंके लिए उत्तरदायी कारणोंको शरीरके भीतरसे नष्ट करता है । इसमें विद्यमान ‘बिटर्स’ और ‘एल्केलाइड’ तत्त्व रक्त-शोधकका कार्य करते…..
मुखके छालोंके लिए यह एक अचूक औषधि है । इसके लिए करेलेकी पत्तियोंका रस निकालकर उसमें थोडीसी मुलतानी मिट्टी मिलाकर इसका पेस्ट बना लें और छालेवाले स्थानपर लगा लें । यदि मुलतानी मिट्टी न हो…..