आयुर्वेद

मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १४)


विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) मांस उत्पादोंको ‘एस्बेस्टस’ और ‘सिगरेट’की भांति कैंसरजनक (कारसेनोजिनिक) तत्वोंमें वर्गीकृत करता है । आपको बता दें, विदेशोंमें…..

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आयुर्वेदका शास्त्र वृहद एवं मनुष्यके लिए कल्याणकारी !


आयुर्वेदकी परिभाषा एवं व्याख्यासे ही यह शास्त्र कितना वृहद एवं मनुष्य मात्रके लिए कल्याणकारी है ?, यह ज्ञात होता है । आयुर्वेद विश्वमें विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययनके…..

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १३)


आप सभीने बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लूका नाम सुना होगा । यह रोग मुर्गे और सुअरोंके माध्यम मनुष्योंतक पहुंचती है । यह रोग हमारे शरीर तक तभी पहुंचती है जब हम इस रोगसे ग्रस्त जीवको….

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १३)


आयुर्वेदाचार्य चरकके अनुसार यदि कोई पशु अपने प्राकृतिक वातावरणमें नहीं रह रहा है या उस भोगौलिक क्षेत्रका मूल निवासी नहीं है या किसी किसी ऐसे वातावरणमें…..

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भोजनके साथ कृत्रिम शीतपेय विष समान है !


आजकल पाश्चात्य भोजनालयोंमें भोजनके साथ शीतपेय परोसनेका प्रचलन है और जो भारतीय विदेशियोंको नेत्र मूंदकर अनुकरण करनेवाले हैं, वे उसे बडे इतराकर सेवन करते हैं; किन्तु ऐसा नहीं करना चाहिए । वस्तुत: भोजनके समय किसी भी प्रकारका, सामान्य तापमानसे नीचेका कोई भी शीतल पेय, विशेषकर कृत्रिम शीतल पेय पदार्थ कदापि न पीएं, इससे जठराग्नि बुझ […]

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.७)


पीलियामें करेलेको पीसकर निकाले रसको दिनमें दो बार पिलाना चाहिए । यकृतसे सम्बन्धित रोगोंके लिए तो करेला रामबाण औषधि है । जलोदर रोग होनेपर आधा कप जलमें २ चम्मच …..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.६)


करेलेमें ‘मैग्नीशियम’ और ‘फॉस्फोरस’ जैसे तत्त्व होते हैं, जो पथरी बननेसे रोकते हैं । पथरी रोगियोंको दो करेलेका रस पीने और करेलेका शाक खानेसे लाभ मिलता है । इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है…..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.५)


यदि आप करेलेका सेवन नहीं करना चाहते हैं तो इसका मुखलेप (फेस-पैक) लगाकर त्वचाको कान्तियुक्त बना सकते हैं । करेलेमें ‘विटामिन-सी’, लोहा, ‘बिटा-केराटिन’…..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.४)


करेलेकी न केवल पत्तियां, वरन करेला भी चर्म रोगमें अत्यधिक लाभप्रद है । यह त्वचाके रोगोंके लिए उत्तरदायी कारणोंको शरीरके भीतरसे नष्ट करता है । इसमें विद्यमान ‘बिटर्स’ और ‘एल्केलाइड’ तत्त्व रक्त-शोधकका कार्य करते…..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.३)


मुखके छालोंके लिए यह एक अचूक औषधि है । इसके लिए करेलेकी पत्तियोंका रस निकालकर उसमें थोडीसी मुलतानी मिट्टी मिलाकर इसका पेस्ट बना लें और छालेवाले स्थानपर लगा लें । यदि मुलतानी मिट्टी न हो…..

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