आयुर्वेद

आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा भारतकी मूल पद्धतियां


अंग्रेजोंके आगमनसे पूर्व अर्थात आजसे दो सौ पूर्वतक प्रत्येक गांवके अनेक सदस्य आयुर्वेदिक जडी-बूटियोंके जानकार होते थे; अतः आजके कुकुरमुत्ते समान फैले हुए विदेशी चिकित्सालयोंकी…..

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भोजनके पश्चात तुरन्त सोएं नहीं


ग्रहण किए हुए भोजनको पचनेमें कुछ समय लगता है, ऐसेमें प्रयास यह कर सकते हैं कि खानेके पश्चात तुरन्त सोएं नहीं, सोनेसे वायु और आंतोंमें संक्रमण होनेकी आशंका बढ जाती है ।  हां, बाएं हाथकी ओर करवट कर बीस मिनिटतक आप अवश्य लेट सकते हैं, इससे सूर्य नाडी चलने लगती है, जिससे भोजन पचनेमें सहायता […]

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आयुर्वेदका महत्त्व


एलोपैथी औषधि (विषम चिकित्सा) रोगके प्रबन्धनपर केन्द्रित होती है, जबकि आयुर्वेद रोगकी रोकथामपर और यदि रोग उत्पन्न हुआ तो कैसे उसके मूल कारणको उच्चाटन किया जाए, उसका ज्ञान प्रदान करता है । इसप्रकार ऐसा कहा जा सकता है कि एलोपैथी मात्र सतही स्तरपर कार्य करता है और आयुर्वेद स्थूल और सूक्ष्म दोनों ही स्तरोंपर कार्य […]

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आयुर्वेद ही श्रेष्ठ है


आजकल जब एलोपैथी चिकित्साके महाविद्यालयोंमें कुछ विद्यार्थियोंको स्नातकमें प्रवेश नहीं मिलता है तो वे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतिसे स्नातककी उपाधि ले लेते हैं, जिसमें प्रतिस्पर्धा एलोपैथीकी तुलनामें अल्प प्रमाणमें होता है एवं आयुर्वेदसे स्नातक लेनेके पश्चात वे एलोपैथी चिकित्सासे रोगियोंका उपचार करते हैं । ऐसे सभी वैद्योंको वस्तुत: आयुर्वेदका महत्त्व ही ठीकसे नहीं पढाया जाता है, […]

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तुलसीके औषधीय गुण (भाग – १)


भारतीय संस्कृतिमें तुलसीके पौधेका बहुत महत्व है और इस पौधेको बहुत पवित्र माना जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्थाका प्रतीक भर नहीं है। इस पौधेमें पाए जाने वाले औषधीय गुणोंके कारण…..

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परिशोधित अर्थात रिफाइण्ड तेलसे होनेवाली हानियां एवं उसके विकल्प


भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानके परीक्षणके अनुसार  भी परिशोधित तेल नहीं उपयोग करना चाहिए ! तेलके परिशोधनकी प्रक्रियामें तेलमेंसे चिपचिपापन और गन्धको निकाल दिया जाता है; अतः वह पदार्थ तेल ही नहीं रहता….आगे पढें…

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.८)


गर्भवती महिलाओंको अधिक करेला खानेसे बचना चाहिए; क्योंकि यह समयसे पूर्व ही शिशु-जन्मका कारक बन सकता है । करेलेके रसमें ‘मोमोकैरिन’ नामक तत्त्व होता है, जो मासिकके….

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घरका वैद्य – स्वर चिकित्सा


स्वरके चलनेकी क्रियाको उदय होना मानकर ‘स्वरोदय’ कहा गया है तथा विज्ञान, जिसमें कुछ विधियां बताई गई हों और विषयके रहस्यको समझनेका प्रयास हो, उसे विज्ञान कहा जाता है । वैसे तो स्वरोदय विज्ञान एक सरल …..

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विरुद्ध आहार (भाग -२)


जिस प्रकार पौष्टिक आहार खानेसे स्वास्थ्य की रक्षा होती है और रोग दूर होते हैं उसीप्रकार कुपौष्टिक आहार खानेसे अनेक प्रकारके रोगोंका बुरा प्रभाव हमारे शरीरपर पडता है ।  प्रकृतिमें कुछखाद्य पदार्थ ऎसे होते है जो रोगोंका कारण होती है । और कुछ पदार्थ ऎसे होते है जो अनेक गुणोंका खान होते हैं । जिसके […]

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आयुर्वेद एक परिपूर्ण शास्त्र कैसे है


आयुर्वेद किसीके पथ्य या जीवन शैली भोजनकी पद्धति या वृत्ति और दैनिक जीवनचर्यापर विशेष महत्त्व देता है । ऋतुमें परिवर्तनके आधारपर जीवनशैलीको कैसे अनुकूल बनाया जाए, इसपर भी आयुर्वेद मार्गदर्शन देता है ।
इसप्रकार आयुर्वेद रोग उत्त्पन्न न हो……

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