धर्म

राजसुख अधिक समय पाने हेतु योग्य साधना एवं धर्मपालन करना आवश्यक !


वर्तमान कालमें राज्यकर्ताओंको राजधर्म व साधनाका ज्ञान नहीं है, इसलिए उन्हें पांच वर्ष अपने सत्ताको बचाए रखने हेतु अनेक प्रपंच करने पडते हैं तत्पश्चात जब पुनः चुनाव आता है तो सत्ता पुनः प्राप्त होगी या नहीं ? यह शंका व्याप्त रहती है । यदि उन्हें राजधर्म सिखाया गया होता तो यह स्थिति कदापि निर्माण नहीं […]

आगे पढें

स्त्रियों ! अपनी मर्यादाका पालन करना सीखें एवं अपने जीवनको सुखी बनाएं !


कुछ समय पूर्व मैंने लिखा था कि जो स्त्रियां अपनी स्त्री सुलभ लज्जाको त्यागकर ओची प्रसिद्धि हेतु अंग प्रदर्शन करती हैं, उनका जीवनमें धन या तथाकथित सामाजिक प्रतिष्ठा होते हुए वे सुखी नहीं होती हैं, उन्हें भिन्न प्रकारसे शारीरिक, मानसिक, कौटुम्बिक एवं अन्य कष्ट होते हैं ! कुछ समय पूर्व ही एक ऐसी ही नटी […]

आगे पढें

मूर्ति विज्ञानके संदर्भमें धर्मशिक्षण देना आवश्यक !


कल समाचारमें देख रही थी, जिसमें समाचार सूत्र बडे गर्वसे बता रहे थे कि एक चिकित्सकने सूखे मेवेसे गणेशजीकी आकृति बनाई और उसे पूजा हेतु चिकित्सालय ले गए हैं । अर्थात मैकाले शिक्षण प्रणालीसे कोई व्यक्ति उच्च शिक्षित हो तो उसे धर्मका ज्ञान होगा या उसका विवेक जाग्रत होगा यह आवश्यक नहीं है ।   […]

आगे पढें

ऐसे कर्म करें जिससे लौकिक एवं पारलौकिक दोनों सुख प्राप्त हो सके !


ऐसे कर्म करें  जिससे लौकिक एवं पारलौकिक दोनों सुख प्राप्त हो सके महात्मा विदुर कहते हैं :-      दिवसेनैव तत् कुर्याद् येन रात्रौ सुखं वसेत् ।      यावज्जीवं च तत्कुर्याद् येन प्रेत्य सुखं वसेत् ॥  दिनभर ऐसे कर्म करो, जिससे रातमें सुखकी नींद आ सके । वैसे ही जीवनभर ऐसे कर्म करो, जिससे […]

आगे पढें

हिन्दू धर्मके आधार ग्रन्थ (भाग – ५)


वेदाङ्ग : वेदके छह अङ्ग माने जाते हैं । इन अङ्गोंके बिना वैदिक ज्ञान अपूर्ण रहता है । १. वेदके नेत्र हैं ज्योतिष २. कर्ण हैं निरुक्त ३. नासिका है शिक्षा ४. मुख है व्याकरण ५. हाथ हैं कल्प और ६. पांव हैं छन्द । शिक्षा : शिक्षामें मन्त्रके स्वर, अक्षर, मात्रा तथा उच्चारणका विवेचन […]

आगे पढें

हिन्दू धर्मके आधार ग्रन्थ (भाग-४)


आरण्यक और उपनिषद् : ब्राह्मण-ग्रन्थोंके जो भाग वनमें पढने योग्य हैं, उनका नाम आरण्यक है । इस समय प्राप्त उपनिषद् लगभग २७५ हैं । ‘कल्याण’के ‘उपनिषद्-अङ्क’में उनकी सूची दी गई है । तेरह उपनिषद मुख्य माने जाते हैं, जिनपर आचार्योंने भाष्य लिखे हैं । उनके नाम ये हैं : १. ईश २. केन ३. कठ […]

आगे पढें

हिन्दू धर्मके आधार ग्रन्थ (भाग-३)


पुराण      पुराण चार प्रकारके है : (१) महापुराण  (२) पुराण  (३) अतिपुराण (४) उपपुराण । इनमेंसे प्रत्येककी संख्या अठारह बताई जाती है । सर्वसाधारणमें महापुराणोंको ही पुराणके नामसे जाना जाता है । इनमें महापुराणोंके नाम निम्न हैं : १. ब्रह्मपुराण २. पद्मपुराण ३. विष्णुपुराण ४. शिवपुराण / वायुपुराण ५. श्रीमद्भागवत, ६. नारदीयपुराण ७. […]

आगे पढें

हिन्दू धर्मके आधार ग्रन्थ (भाग-२)


वेदकी शाखाएं : ऋषियोंने अपने शिष्योंको अपनी सुविधानुसार मन्त्रोंको पढाया । किसीने एक छन्दके सब मन्त्र एक साथ पढाए । दूसरेने एक देवताके सब मन्त्र साथ पढाए । तीसरेने मन्त्रोंको उनके विषय अथवा उपयोगके अनुसार रखा । इस प्रकार सम्पादन-क्रमसे एक वेदकी अनेक शाखाएं हो गईं । ऋग्वेदकी २१ शाखाएं कही जाती हैं । उनमेंसे […]

आगे पढें

हिन्दू धर्मके आधार ग्रन्थ (भाग – १)


 वर्तमान कालमें अनेक लोगोंको हिन्दू धर्मके मुख्य ग्रन्थोंके विषयमें जानकारी नहीं है। सत्य तो यह है कि हमारे धर्मग्रन्थोंकी विशाल थातीको मलेच्छ आक्रमणकारियोंद्वारा हिन्दू धर्मके प्रति द्वेषके कारण नष्ट कर दिया गया; कुछ ग्रन्थ तो लोगोंकी असावधानीके कारण नष्ट हो गए और कुछ कीडोंके कारण; किन्तु जो बचे हुए हैं, उन्हें भी लोग पढते नहीं, […]

आगे पढें

धर्माचार्योंद्वारा पाखंडी कथावाचकोंका विरोध करनेका प्रभाव निश्चित ही व्यापक पडेगा !


कुछ हिन्दू धर्माचार्योंने अब खुलकर उन कथावाचकोंका विरोध करना आरम्भ कर दिया है, जो सर्वधर्मसमभावका समर्थन व्यासपीठसे करते हैं ! यह बहुत पहले ही होना चाहिए था; किन्तु देर ही सही, इसका निश्चित ही व्यापक प्रभाव पडेगा एवं हिन्दुओंके लिए एक स्वधर्माभिमानयुक्त नूतन कालका शुभारम्भ होगा । हम उनके इस विरोधका अनुमोदन करते हैं ।

आगे पढें

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution