धर्म

इटलीके निरंकुश शासक (तानाशाह) मुसोलिनीके जीवनकी एक ऐसी घटना है, जिसे जानकर आप हिन्दुत्वपर गर्व करेंगे


इटलीमें बसे हिन्दुओंने भारतके महान सङ्गीतकार पण्डित ओंकारनाथ ठाकुरको इटलीमें आमन्त्रित किया था । उस समय इटलीके ‘तानाशाह’ मुसोलिनीने पण्डित ओंकारनाथ ठाकुरके सम्मानमें रात्रिभोजका आयोजन किया । मुसोलिनीकी कई प्रेमिकाओंमें एक प्रेमिका बंगालन थी, जिसे सङ्गीतका बहुत अच्छा ज्ञान था । उसने कई बार मुसोलिनीसे कहा कि उसकी अनिद्राका उपचार सङ्गीतमें है, तो वह इस […]

आगे पढें

शङ्खका स्वास्थ्य, धर्म एवं ज्योतिषमें महत्त्व !


स्वास्थ्यमें महत्त्व : * ‘नासा’के अनुसार, शङ्ख बजानेसे खगोलीय ऊर्जाका उत्सर्जन होता है, जो वातावरणमें विद्यमान विषाणुओंका नाशकर लोगोंमें ऊर्जा व शक्तिका सञ्चार करती है । * शङ्खमें १००% ‘कैल्शियम’ है । इसमें रात्रिमें पानी भरकर पीनेसे ‘कैल्शियम’की आपूर्ति होती है । * शङ्ख बजानेसे योगकी तीन क्रियाएं एक साथ होती हैं – कुम्भक, रेचक […]

आगे पढें

शमी पौधेसे सम्बन्धित विशेष तथ्य (भाग-२)


• यह वृक्ष जेठके महीनेमें भी हरा रहता है । ऐसी गर्मीमें जब रेगिस्तानमें जानवरोंके लिए धूपसे बचनेका कोई सहारा नहीं होता, तब यह पेड छाया देता है । जब खाने हेतु कुछ नहीं होता है, तब यह चारा देता है, जो ‘लूंग’ कहलाता है । • इसका फूल ‘मींझर’ तथा फल ‘सांगरी’ कहलाता है, […]

आगे पढें

शमी वृक्षसे सम्बन्धित विशेष तथ्य (भाग – १)


शमी वृक्षके गुण एवं महत्त्व : शमीको भगवान गणेशका प्रिय वृक्ष माना जाता है और शिवके साथ उनकी पूजामें भी इसकी पत्तियां चढाई जाती हैं । इसमें भगवान शिवका वास भी माना गया है, जो श्रीगणेशके पिता हैं और मानसिक क्लेशोंसे मुक्ति देनेवाले महादेव हैं । यही कारण है कि शमीपत्रका चढावा श्रीगणेशकी प्रसन्नतासे बुद्धिको […]

आगे पढें

कुछ विशेष वृक्षोंको क्यों लगाना चाहिए ?


१. पीपल : हिन्दू धर्ममें धार्मिक मान्यताओंके कारण पीपलके वृक्षकी पूजा अति प्राचीन कालसे हो रही है । अब आधुनिक वैज्ञानिक भी कहने लगे हैं कि यह वृक्ष सबसे अधिक ‘ऑक्‍सीजन’ देता है । अतएव पर्यावरणको शुद्ध व पवित्र करने हेतु इस वृक्षको जहां सम्भव हो वहां लगाना चाहिए । २. बरगद : वटवृक्षकी भी […]

आगे पढें

तुलसी कण्ठी मालासे सम्बन्धित कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य


कृष्णप्रिया तुलसी जीवका परम कल्याण करनेवाली हैं । जिनके कण्ठमें तुलसीजी होती हैं, वे यमका त्रास नहीं पाते । ऐसे साधक-जीव गोलोकको प्राप्त होते हैं । जन्म-मरणके चक्रसे छूट जाते हैं और अन्ततः नित्यलीलाको प्राप्त करते हैं । कण्ठमें तुलसी धारण करते हुए स्नान करनेवाले मनुष्यको सम्पूर्ण तीर्थोंका फल प्राप्त होता है । जिस प्रकार […]

आगे पढें

वैशाखके माहमें श्री श्रीतुलसीके लिए जलदानका महत्त्व


वैशाखके माहमें; सूर्यके तापमें वृद्धि हो जाती है; इसलिए विष्णुके भक्तगणको जलदान करनेसे श्रीहरि अत्यन्त प्रसन्न होते हैं । भगवान श्रीहरि कृपा करके उन्हें, तुलसी वृक्षको जलदानका एक सुयोग अथवा शुभ अवसर प्रदान करते हैं । किन्तु तुलसीको जलदान क्यों करना चाहिए ? तुलसी श्रीकृष्णकी प्रेयसी हैं, उनकी कृपाके फलसे ही हम भगवान श्रीकृष्णकी सेवाका […]

आगे पढें

पूजामें प्रयोग होनेवाली ये सामग्रियां कभी नहीं होती बासी !


पूजामें प्रयोग होनेवाली ये सामग्रियां कभी नहीं होती बासी, पुरानी होनेपर भी आप कर सकते हैं इनका प्रयोग – पूजा-पाठमें बासी सामग्रियोंका प्रयोग करना वर्जित माना जाता है । जैसे बासी फूल-पत्ती, जल, फल इत्यादि कभी नहीं चढाए जाते हैं; किन्तु कुछ ऐसी सामग्रियां हैं जिनका प्रयोग आप उनके बासी होनेपर भी पूजामें कर सकते […]

आगे पढें

चार्वाक तत्त्वज्ञानका त्यागकर, अपने मनुष्य जीवनको करें सार्थक !


‘जबतक जीवो खाओ, पीवो और मौज करो’, मरनेके पश्चात क्या होता है ? किसने देखा है ! हिन्दुओ, इस सत्यानाशी चार्वाक तत्त्वज्ञानकी वृत्तिने ही आज प्रत्येक घरमें रावण राज्य निर्माण किया है । घर समाजकी एक इकाई है । यदि यहां रावण राज्य है तो स्वाभाविक है समाजमें भी रावण राज्यका निर्माण होगा ही; अतः […]

आगे पढें

राजसुख अधिक समय पाने हेतु योग्य साधना एवं धर्मपालन करना आवश्यक !


वर्तमान कालमें राज्यकर्ताओंको राजधर्म व साधनाका ज्ञान नहीं है, इसलिए उन्हें पांच वर्ष अपने सत्ताको बचाए रखने हेतु अनेक प्रपंच करने पडते हैं तत्पश्चात जब पुनः चुनाव आता है तो सत्ता पुनः प्राप्त होगी या नहीं ? यह शंका व्याप्त रहती है । यदि उन्हें राजधर्म सिखाया गया होता तो यह स्थिति कदापि निर्माण नहीं […]

आगे पढें

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution