अनिष्ट शक्तियोंके कारण कलह-क्लेश होता है, यह जाननेके पश्चात् अनेक साधक अपने घरमें हो रहे कलह-क्लेशको पूर्णत: अनिष्ट शक्तियोंके कारण हो रहा है, यह कहते हैं; परन्तु ऐसा नहीं है, वर्तमान कालमें कौटुम्बिक कलह-क्लेश, अनिष्ट शक्तियोंके कारण होता है, यह सत्य है; परन्तु हमारे जीवनमें होनेवाले कलह-क्लेशमें ६० % क्लेशके लिए हमारे ‘स्वाभाव-दोष एवं अहं’ […]
हमारे वैदिक संस्कृतिमें पात्र देखकर उन्हें मंत्र दिया जाता था या वेद पढनेका अधिकार दिया जाता था; परंतु आज स्थिति विपरीत है । एक देसी कहावत है ‘सब धान बाईस पसेरी’ अर्थात मोटे और महीन धान, सबको एक समान मोललगाना अयोग्य है । कलियुगी गुरु बिना पात्रता देखे सभीको गायत्री मंत्र या ‘ॐ’ जपनेका अधिकार […]
६०% अध्यात्मिक स्तरके नीचे वाले व्यक्तिके विषय- वासनाके संस्कार तीव्र होते हैं और उनकी पूर्ति हेतु सामाजिक जीवनकी आवश्यकता होती है । ६०% के ऊपरके स्तर पर साधक मनोवृत्तिका होने के कारण एवं विषय- वासनाके संस्कार कम होने के कारण और साधनारत वह धीर-धीरे आतमानन्द में लीन रहने लगता है ऐसे में उसे एकान्तिक जीवन […]
१. जिसने धर्मशास्त्रोंका गहन अध्ययन किया हो, २.जिसने आत्म साक्षात्कार के लिए अखंड प्रयत्न कर उन ग्रन्थों की मुद्दे को आत्मसात करने का प्रयास किया हो और उस प्रयास में अखंडता बनाए हुए हो, ३. जो आत्मज्ञानी या आत्मज्ञान की प्रक्रिया में पूर्ण समय लिप्त हो, ४. जो कोई पूर्णत्व प्राप्त संत की शरण में […]
वैसे तो निष्काम साधनाको संतोंने और धर्म शास्त्रोंने श्रेष्ठ प्रकारकी साधना कहा है किन्तु एक सामान्य साधक सकाम साधनासे ही निष्काम साधना की और बढ़ता है अतः अध्यात्मिक यात्रामें सकाम साधनाका भी अपना महत्व है। उदाहरण के रूप में यदि कोई व्यक्ति कुछ भी साधना नहीं करता और उसके जीवनमें कोई ऐसा कष्ट है […]
कुछ व्यक्ति कहते हैं कि मैं साधना तो करना चाहता हूं परंतु मुझे फलां -फलां अडचनें हैं, तो ध्यान रखें आध्यात्मिक प्रगतिके लिए सबसे आवश्यक घटक है “तीव्र तडप” का होना, जब तक हममें यह गुण रहता है, हम प्रत्येकअडचनको मात देते हुए, आध्यात्मिक पथपर आगे बढते जाते हैं -तनुजा ठाकुर
जिसप्रकार सामान्य व्यक्तिमें काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और मत्सर रुपी षडरिपु होते हैं, उसीप्रकार ईश्वरके नाममें श्री, यश, ऐश्वर्य, धर्म, ज्ञान और वैराग्य रुपी षड्गुण होते हैं – तनुजा ठाकुर
अपने व्यावहारिक समयमेंसे थोडा समय निकालकर निष्काम भावसे नियमित व्यष्टि एवं समष्टि साधना हेतु प्रयत्न करें । आपके जीवनमें उच्च कोटिके संतका पदार्पण स्वतः ही हो जाएगा -तनुजा ठाकुर
एक बूंद तेल और एक बूंद जल मिल नहीं सकता क्योंकि दोनोंके घटक अलग-अलग होते हैं । दोनोंको एक होनेके लिए किसी एकने दुसरेके गुण आत्मसात कर अपने अस्तित्त्वको मिटाना चाहिए, उसी प्रकार यदि हमें परमेश्वरसे एकरूप होना है तो उनके दिव्य गुणों को आत्मसात करना होगा तभी पूर्णत्वकी प्राप्ति संभव है -तनुजा ठाकुर
कल किसी व्यक्तिका संगणकीय संपत्र (मेल) आया । उन्होंने लिखा है कि मैं आपको गुरु स्वरुपमें देखता हूं, आपके जालस्थल और यू ट्यूबपर नित्य विडियो देखता हूं, आपकेध्वनिमें ध्वनिमुद्रित दत्तका जप लगाकर उसे भी नित्य करता हूं , मैं आपको एक सहस्र(हज़ार) रुपये भेज रहा हूं, आप उसके चप्पल क्रय कर लें, ऐसी मेरी इच्छा […]