आयुर्वेद

आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ९)


लहसुन (लसुनम्, Garlic) एक ऐसी खाद्य सामग्री है, जो कई तरकारियोंका स्वाद बढा देती है । लगभग प्रत्येक रसोईमें पाई जाने वाली ये खाद्य सामग्री केवल तरकारियोंका स्वाद ही नहीं बढाती, वरन यह स्वास्थ्यके लिए भी अत्यधिक लाभदायक…….

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ८)


आंवलाको (अमृता, अमृतफल, आमलकी) सबसे महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक घटकके रूपमें कहा जा सकता है । यह भोजन और औषधि दोनों ही है ! यह छोटासा फल असंख्य स्वास्थ्य लाभोंसे भरा है । अमला शब्द ‘खट्टा’का उल्लेख करता है……

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ७)


आम्बा हल्दी (हरिद्रा, Turmeric) एक महत्त्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है और रसोईमें काम आना वाला महत्वपूर्ण पदार्थ भी है । भारतीय भोजनकी हल्दीके बिना कल्पना करना भी मुश्किल है । इसमें पाए जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्स…..

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ६)


मेथीका साग सर्दियोंमें अत्याधिक रुचिसे खाया जाता है । मेथीके कई प्रकारके प्रयोग हैं; किन्तु इसकी पत्तियोंको तरकारीके (सब्जीके) समान उपयोग करना सबसे अधिक लोकप्रिय है…..

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ५)


आगसे जल जानेपर कच्चे आलूको पीसकर रस निकाल लें और जले हुए स्थानपर उस रसको लगानेसे आराम हो जाता है । इसके अतिरिक्त इमलीकी छाल जलाकर उसका महीन चूर्ण बना लें……

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हृदय रोगोंके लिए वरदान है अर्जुनकी छाल


हृदय रोगीके लिए अर्जुनके वृक्षकी छालका सेवन बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है । यह हृदयकी सभी समस्‍याओंके लिए वरदान है । इसकी छालका महीन चूर्ण सूती कपडेसे छानकर ३ -३ ग्राम (आधा छोटा चम्मच) जलके साथ प्रातः और सन्ध्यामेेंं सेवन करना…….

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अदरकके आयुर्वेदिक गुण


अदरक एक शक्तिशाली ऑक्सीकरण रोधी (एंटीऑक्सीडेंट) पदार्थ है, जो प्रतिरक्षा प्रणालीको सशक्त करता है; जिससे यह सर्दी-खांसी तथा इस ऋतुमें होनेवाले ज्वरका जाना-माना उपचार है । ऊपरी श्वास मार्गके संक्रमणमें….

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दांतोंके रोगमें अमरूद व उसके पत्तोके गुण


मसूडोंमें वेदना (दर्द), दांतोंमें वेदना और सूजनकी समस्याओंका उपचार करनेके लिए १ गिलास जलमें ३ से ४ पत्ते अमरूदके उबाल लें और हल्का गुनगुना होनेपर छान ले । अब इस जलमें थोडा नमक मिला कर कुल्ला करे, दांतों और मसूडोंकी…..

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शीत ऋतुमें हरा धनिया गुणकारी


शिशिर ऋतु (जाडेमें) सर्दी-खांसी होना सामान्य बात है; इसलिए प्रकृतिने इस समय बहुतसे ऐसे तरकारी एवं फल दिए हैं, जिससे हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता बढती है और ऐसे रोगोंसे हमारा बचाव होता है….

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चाय कैसे बनाएं ?


भारत जैसे उष्ण प्रदेशमें जहां वैसे ही लोगोंमें अम्लता अधिक होती है, इसका सेवन करनेसे अधिक अम्लताके कारण छाती और उदरमें अर्थात पेटमें जलन होती है, इसलिए हमारे देशमें जहां……

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