लहसुन (लसुनम्, Garlic) एक ऐसी खाद्य सामग्री है, जो कई तरकारियोंका स्वाद बढा देती है । लगभग प्रत्येक रसोईमें पाई जाने वाली ये खाद्य सामग्री केवल तरकारियोंका स्वाद ही नहीं बढाती, वरन यह स्वास्थ्यके लिए भी अत्यधिक लाभदायक…….
आंवलाको (अमृता, अमृतफल, आमलकी) सबसे महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक घटकके रूपमें कहा जा सकता है । यह भोजन और औषधि दोनों ही है ! यह छोटासा फल असंख्य स्वास्थ्य लाभोंसे भरा है । अमला शब्द ‘खट्टा’का उल्लेख करता है……
आम्बा हल्दी (हरिद्रा, Turmeric) एक महत्त्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है और रसोईमें काम आना वाला महत्वपूर्ण पदार्थ भी है । भारतीय भोजनकी हल्दीके बिना कल्पना करना भी मुश्किल है । इसमें पाए जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्स…..
मेथीका साग सर्दियोंमें अत्याधिक रुचिसे खाया जाता है । मेथीके कई प्रकारके प्रयोग हैं; किन्तु इसकी पत्तियोंको तरकारीके (सब्जीके) समान उपयोग करना सबसे अधिक लोकप्रिय है…..
आगसे जल जानेपर कच्चे आलूको पीसकर रस निकाल लें और जले हुए स्थानपर उस रसको लगानेसे आराम हो जाता है । इसके अतिरिक्त इमलीकी छाल जलाकर उसका महीन चूर्ण बना लें……
हृदय रोगीके लिए अर्जुनके वृक्षकी छालका सेवन बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है । यह हृदयकी सभी समस्याओंके लिए वरदान है । इसकी छालका महीन चूर्ण सूती कपडेसे छानकर ३ -३ ग्राम (आधा छोटा चम्मच) जलके साथ प्रातः और सन्ध्यामेेंं सेवन करना…….
अदरक एक शक्तिशाली ऑक्सीकरण रोधी (एंटीऑक्सीडेंट) पदार्थ है, जो प्रतिरक्षा प्रणालीको सशक्त करता है; जिससे यह सर्दी-खांसी तथा इस ऋतुमें होनेवाले ज्वरका जाना-माना उपचार है । ऊपरी श्वास मार्गके संक्रमणमें….
मसूडोंमें वेदना (दर्द), दांतोंमें वेदना और सूजनकी समस्याओंका उपचार करनेके लिए १ गिलास जलमें ३ से ४ पत्ते अमरूदके उबाल लें और हल्का गुनगुना होनेपर छान ले । अब इस जलमें थोडा नमक मिला कर कुल्ला करे, दांतों और मसूडोंकी…..
शिशिर ऋतु (जाडेमें) सर्दी-खांसी होना सामान्य बात है; इसलिए प्रकृतिने इस समय बहुतसे ऐसे तरकारी एवं फल दिए हैं, जिससे हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता बढती है और ऐसे रोगोंसे हमारा बचाव होता है….
भारत जैसे उष्ण प्रदेशमें जहां वैसे ही लोगोंमें अम्लता अधिक होती है, इसका सेवन करनेसे अधिक अम्लताके कारण छाती और उदरमें अर्थात पेटमें जलन होती है, इसलिए हमारे देशमें जहां……