आयुर्वेद

बादामके औषधीय गुण (भाग – २)


सिरकी वेदना – बादाम और केसरको गायके घीमें मिलाकर सिरमें लगाना चाहिए या तीन दिन तक बादामकी खीर खानी चाहिए अथवा बादाम और घीको दुग्धमें मिलाकर सिरमें लगाना चाहिए । इससे सिर कुछ ही समयमें ठीक हो जाता है । बादाम और कपूरको दुग्धमें पीसकर मस्तकपर उसका लेप करनेसे मस्तक और सिरकी वेदना मिट जाता […]

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बादामके औषधीय गुण भाग – १


बादामके(ईषद्विर्य, वातामके ) वृक्ष, पर्वतीय क्षेत्रोंमें अधिक पाए जाते हैं । इसके तने मोटे होते हैं । इसके पत्ते लम्बे, चौडे और मुलायम होते हैं। इसके फलके भीतरके  मींगीको बादाम कहते हैं । बादामके वृक्ष एशियामें ईरान, ईराक, सउदी अरब आदि देशोंमें अधिक मात्रामें पाए जाते हैं । हमारे देशमें जम्मू कश्मीरमें इसके पेड पाए […]

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नाभिमें तेल लगानेके लाभ


नाभि शरीरका केन्द्र बिन्दु होता है । मुखकी सुन्दरता और शरीरकी वेदनाके लिए हम बहुत प्रयोग करते हैं और बहुत औषधियोंका सेवन भी करते हैं । यदि हमें ज्ञात हो कि इतना सब करनेके स्थानपर एक अति सुक्ष्म प्रयोग हमारी वेदना और शरीरके स्वास्थ्यके लिए गुणकारी हो सकता है तो हम अवश्य ही वह करना […]

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दहीके (दधि, क्षीरजं ) औषधीय गुण


दही( दधि, क्षीरजं ) एक दुग्ध-उत्पाद है जिसे दूधके जीवाण्विक किण्वनके द्वारा बनाया जाता है। लैक्टोजके किण्वनसे लैक्टिक अम्ल बनता है, जो दूधके प्रोटीनपर कार्य करके इसे दहीकी बनावट और दहीकी लाक्षणिक खटास देता है । दही अनेक प्राचीन सभ्यताओंका अंग रही है । आज यह सम्पूर्ण विश्वमें भोजनका एक अविभाज्य घटक है । यह […]

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अलसीके औषधीय गुण (भाग -२)


महिलाओंमें अंतःस्राव (हॉर्मोन) सन्तुलनमें लाभप्रद – इसमें पाए जाने वाले फाइटोएस्ट्रोजनके कारण यह महिलाओंके लिए लाभकारी है । महिलाओंमें रजोनिवृत्तिके समय होनेवाले अंतःस्राव परिवर्तन और उसके कारण होनेवाली समस्याएं जैसे अत्यधिक गर्मी (Hot Flashes), व्यकुलता, अनियमित रक्तस्त्राव (dysfunctional uterine bleeding), कमरमें वेदना, योनिका शुष्क होना और जोडोंकी वेदनामें यह बहुत अधिक लाभप्रद है । मधुमेहको […]

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अलसीके औषधीय गुण (भाग -१)


अलसी या तीसी समशीतोष्ण प्रदेशोंका पौधा है । रेशेदार फसलोंमें इसका महत्वपूर्ण स्थान है। बीज निकालनेवाले देशोंमें भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा अर्जेण्टाइनाके नाम उल्लेखनीय हैं । अलसी भारतवर्षमें भी अनादी कालसे उगाया जा रहा है, इसका उल्लेख कुछ प्राचीन ग्रंथोंमें भी मिलता है । लाल, श्वेत तथा धूसर रंगके भेदसे इसकी तीन उपजातियां हैं […]

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पुदीनेके औषधीय गुण


पुदीनेका उपयोग वैसे तो सम्पूर्ण वर्ष भारत भर लोग किसी न किसी रूपमें करते हैं किन्तु ग्रीष्मकालमें पुदीनेका उपयोग अधिक किया जाता है अतः आज हम पुदीनेके औषधीय पक्षके विषयमें जानेंगे । पुदीनेका (पूतिहा) मूल उत्पत्ति स्थान भूमध्य सागरीय प्रदेश है; परन्तु आज विश्वके अधिकांश देशोंमें इसका उत्पादन हो रहा है । भारतके लगभग सभी […]

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खीरेके औषधीय गुण


  खीराकी (त्रपुश, कंटकी फल) मूल उत्पत्ति भारतमें मानी जाती है, पश्चिम एशियामें ३००० वर्षोंसे इसकी खेतीकी जाती है । भारतसे यह ग्रीस और इटलीमें फैल गया और तत्पश्चात चीनमें फैल गया । आयुर्वेदके अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, दाहपित्त तथा रक्तपित्त दूर करनेवाला रक्त विकारनाशक है । खीरा व ककडी एक ही प्रजातिके फल […]

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ग्रीष्म ऋतुमें क्यों करे तरबूजका सेवन


तरबूज जिसे संस्कृतमें कालिंग, षण्मुखा, गोडिम्बके नामसे जाना जाता है, ग्रीष्मकालमें शरीरको शीतलता प्रदान करनेका एक अति उत्तम स्रोत हैं | तरबूज मात्र एक स्वादिष्ट फल नहीं है; अपितु जल तत्वसे परिपूर्ण त्वरित ऊर्जा देनेवाला फल है । तरबूजमें ९६% जल होता है और यह तृष्णाको भी शान्त करता है । तरबूज खानेसे शरीरमें शीतलताका […]

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ताम्र जलके सेवनसे होनेवाले लाभ


ताम्र जलको ग्रहण करनेसे स्वास्थ्य लाभके साथ ही कुछ रोगोंका निवारण करनेमें सहायता मिलती है | मानव सभ्यताके इतिहासमें ताम्बेका एक प्रमुख स्थान है; क्योंकि प्राचीन कालमें मानवद्वारा सबसे पहले प्रयुक्त धातुओं और मिश्रधातुओंमें तांबा और कांसेका (जो कि तांबे और टिनसे मिलकर बनता है) नाम आता है । तांबेके पात्रोंमें रखे जल अर्थात ताम्र […]

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