कश्मीरमें सेवारत सभी सैनिकों भाइयोंके धैर्यको देखकर आश्चर्य होता है, उनकी देशभक्तिको नमन करनेको मन करता है, कोई और देशके सैनिक होते तो वे इस निर्दय व्यवस्थाके विरुद्ध विद्रोह कर देते….
कश्मीर हमारे देशका सिरमौर है, वह हमारे देशका अभिन्न अंग था है और रहेगा । स्वार्थान्ध और सत्तालोलुप नेताकी मुस्लिम तुष्टिकरणकी नीतिके कारण ही कश्मीर ही यह दुःस्थिति हुई है…
राष्ट्रके उत्थानका कार्य, स्वार्थान्ध एवं सत्तालोलुप लोग नहीं कर सकते हैं, वे सत्ता पाने हेतु एक साथ आ सकते हैं; किन्तु स्वार्थसिद्धि नहीं होनेपर वे त्वरित पृथक भी हो जाते हैं, उनके लिए राष्ट्र और समाजका कोई महत्त्व नहीं होता ! इस देशके सात दशकका लोकतंत्र यही हमें बताता है।
जितनी सरलतासे सभी दुर्जन प्रवृत्तिके व्यक्ति अपनी स्वार्थसिद्धि हेतु एकत्रित होते हैं, उतने ही मनोयोगसे यदि सज्जन राष्ट्र और धर्मके उत्थान हेतु संगठित हो तो इस देशका भविष्य परिवर्तित होनेमें समय नहीं लगेगा….
जिन राजनीतिक दलोंको अब प्रत्येक बातके लिए न्यायालयकी शरण लेनी पडती हो, ऐसे दल और उसके राज्यकर्ता समाज और राष्ट्रके लिए नियम बनानेकी योग्यता रखते हैं क्या ? वह दिन दूर नहीं होगा जब वे अपने बनाए हुए नियमोंके लिए स्वयं ही न्यायालयका चक्कर लगाते हुए दिखाई देंगे ?
हम इतिहासके उस कालमें खडे हैं जहां आप स्वयं ही आजके तथाकथित लोकतन्त्रके समर्थकों और पालकोंद्वारा उसके पतनके लिए वे कितना निम्न स्तरतक जा सकते हैं ? इसके साक्षी बन रहे हैं !
रामराज्य आदर्श राज्य था । भगवान राम एक आदर्श राजा थे, सीता माताके चरित्रपर एक सामान्य रजकके मात्र शंका व्यक्त करनेपर उन्होंने उनका परित्याग किया; इससे ही वे कितने प्रजावत्सल थे, यह ध्यानमें आता है….
एक व्यक्तिने पूछा है कि कांग्रेसका क्या भविष्य है इस देशमें, क्या आप बता सकती हैं ? मैंने कहा, “अवश्य, कांग्रेस अब इतिहासके पन्नोंमें जानेवाली एक ऐसा राजनीतिक दल होगा, जिसका लोग भविष्यमें, हिन्दू धर्मद्रोही और समाजकंटकके रूपमें स्मरण करेंगे….
आजके राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं या सदस्योंमें अपने दलके प्रति ही निष्ठा नहीं सिखा पाते हैं। निर्वाचित सदस्य किसी और दलमें सत्ता पानेके लोभमें बिक न जाएं इसलिए अब उन्हें वे ‘रिसोर्ट’में सर्व सुख सुविधाएं देकर एक प्रकारसे कुछ दिवसके लिए बन्दी बनाकर रख लेते हैं…
चुनाव पूर्व, अन्य राजनीतिक दलोंसे मात्र प्रतिद्वंद्वी होनेका नाटक कर यहांकी जनताको मूर्ख बनाते हैं। सभीका लक्ष्य मात्र और मात्र सत्ता प्राप्त करना होता है, इस हेतु वे किसीके भी साथ हाथ मिला सकते हैं और मिला लेते हैं…