श्रीगुरु उवाच

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पूर्व कालमें व्यक्ति अपनी तेजस्विताके कारण चमकते थे, आज मनुष्यके पास वह क्षमता न होनेके कारण कपडे, चप्पल जैसी विविध वस्तुओंके ऊपर चिमकी लगानी पडती  है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले

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आधुनिक औषधियोंकी अपेक्षा आयुर्वेदिक औषधियोंके अधिक परिणामकारक होनेका कारण ! आधुनिक औषधियां ‘पृथ्वी, आप एवं तेज’ इन तीन तत्त्वोंके स्तरकी होनेके कारण उनकी क्षमता बहुत अल्प होती है । इसके विपरीत आयुर्वेदिक औषधियोंके निर्माणके समय मंत्रजप भी किया जाता है, इससे वे औषधियां उपर्युक्त तीन तत्त्वोंके साथ ही वायु एवं आकाश तत्त्वके स्तरकी तथा कालानुसार […]

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हिंदुओंकी दुःस्थितीका कारण स्वातंत्र्योत्तरकालमें जात्यंध एवं बुद्धिप्रामाण्यवादियोंके कारण हिंदुओंकी एकजुटता नष्ट हुई । इस कारण भी उनकी अत्यधिक दयनीय स्थिति हुई है ।-  परात्परगुरु  डॉ. जयंत आठवले

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अध्यात्मप्रसार क्रियाशक्तिकी अपेक्षा ज्ञानशक्तिके कारण अधिक होता है ! १९८६ से २००६ तकके इन कालखंडमें मैंने अध्यात्मशास्त्रीय व्याख्यान, अभ्यासवर्ग और सार्वजनिक सभाओंको लेने हेतु अधिकसे अधिक समय भ्रमण किया | वर्ष २००७ से प्राणशक्ति अत्यल्प होनेके कारण मैं कहीं बाहर नहीं जा सका | पहले मुझे लगा कि अब मैं बाहर नहीं जा पाऊंगा तो […]

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‘पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू, योगऋषि रामदेवबाबा, श्री श्री रविशंकर इत्यादिके नामोंसे उनके सम्प्रदाय पहचाने जाते हैं; किन्तु सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति मेरे नामसे नहीं जाने जाते, इसके विपरीत उनके नामके कारण मेरे नामकी समाजमें पहचान है ! –  परात्पर गुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (१६.१.२०१४) भावार्थ : सनातन संस्था एवं हिन्दू जन […]

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अध्यात्मका अधिकारी कौन ? जो सर्व प्रथम साधकके पदको सिद्ध करता है और उसके पश्चात शिष्य, वही अध्यात्मका अधिकारी बन सकता है अर्थात् उसे ही आत्मतत्त्वके विषयमें अनुभूति मिल सकता है | – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले  

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जब कौरवोंपर गन्धर्वोंने आक्रमण किए और धर्मराज युधिष्ठिरको जब यह ज्ञात हुआ तब उन्होंने कौरवोंकी सहायता करनेका निर्णय लिया  । इसपर भीमने पूछा कि कौरवोंने हमें इतना प्रताडित किया है तब भी हमें भागकर उनकी सहायता क्यों करनी चाहिए  । धर्मराजने उत्तर दिया, “कुछ भी हुआ हो, तब भी कौरव हमारे बन्धु हैं; अतः हमें […]

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सभीको थोडे समयके लिए फंसाना सरल होता है, कुछ व्यक्तिको सर्व काल फंसा सकते हैं मात्र सभीको सर्वकाल नहीं फंसाया जा सकता है इस अर्थका एक कहावत है | यह मायाके विषयके संदर्भमें है | इसी कारण बुद्धिप्रमाण्यवादियोंद्वारा सभीको सर्वकाल फंसाना संभव नहीं होता | इसके विपरीत धर्म सत्यका प्रतिपादन करता है अतः सर्वकाल सभीको […]

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हिंदुओंका ऐसा सोचना कि बिना आध्यात्मिक बल हम कुछ भी कर सकते हैं, यह अज्ञानता और अहंके लक्षण हैं | अतः इस प्रकारका अयोग्य दृष्टिकोण न रखें और आध्यात्मिक क्षमता बढाने हेतु साधना करें ! – परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले  

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कुछ साधक साठ प्रतिशत या सत्तर प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर कुछ महीनोंमें पाना है, जन्मदिन तक पाना है, इस प्रकारके ध्येय रखते हैं, उन्होंने यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चेको बडे होनेमें एक वर्ष लगते हैं | दरिद्रको धनवान होनेमें अनेक वर्ष लगते हैं | उसी प्रकार ४० या ४५ प्रतिशत से ६० या ७० प्रतिशत […]

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