सूक्ष्म जगत

पितरोंके सद्गति हेतु ‘ऑनलाइन’ सामूहिक जप आरम्भ करनेपर कष्ट होना !


पितरोंके सद्गति हेतु ‘ऑनलाइन’ सामूहिक जपको यश मिल रहा है । भारतके अतिरिक्त पांच और देशमें रह रहे प्रवासी हिन्दू इसका लाभ उठा रहे हैं । अब यह कैसे हो सकता है कि जिन पितरोंने कुपित होकर अपने वंशजोंके जीवनमें अनेक अडचनें निर्माण की हों, उन्हें सद्गति देने हेतु हम समष्टि प्रयास करें और हमें […]

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दुर्घटना सम्भावित क्षेत्रोंसे संबंधित सूक्ष्म जगतके तथ्य !


नवम्बर २०१८ से जब हमने इंदौरके मानपुर ग्राममें उपासनाके आश्रमका निर्माण कार्य आरम्भ किया और इस क्रममें हम इंदौर महानगरसे, जहां हम कुछ समयके लिए भाडेपर एक घर लेकर रह रहे थे, वहांसे निर्माण कार्यके निरीक्षण हेतु जब भी इंदौरसे आगरा-मुम्बई राजमार्गसे मानपुर आते या पुनः लौटते तो प्रत्येक बार, एक वर्षतक, हमें उस मार्गमें […]

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सूक्ष्म जगत – अग्निहोत्र मार्गदर्शनकी पूर्वसिद्धता आरम्भ करनेपर हुआ अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट !


कलसे अग्निहोत्र करने हेतु लोगोंके मार्गदर्शन हेतु सर्व पूर्वसिद्धता आरम्भ की है और मध्याह्न आते-आते मेरे मुखपर कई स्थानोंपर बडे-बडे लाल चकत्ते दिखाई देने लगे हैं और संध्या समय होते-होते वे लाल-लाल दानेमें परिवर्तित हो गए ……

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वैदिक उपासना पीठके मानपुर आश्रममें इस वर्ष बसंत पंचमीमें स्थानान्तरित होना एक ईश्वरीय नियोजन !


     पिछले वर्ष सितम्बर माहमें हमने सोचा कि अप्रैल माहमें हम इंदौर नगरसे मानपुरके निर्माणाधीन आश्रममें स्थानान्त्तरित होंगे ! क्योंकि स्वास्थ्यकी स्थिति तो अपंगों जैसी ही हैं ! इसलिए सोचा कि लेखन इत्यादि भी रहता है; अतः सब धीरे-धीरे व्यवस्थित होने देते हैं ! किन्तु तभी दिसंबरके प्रथम सप्ताहमें ऐसे विचार आने लगे कि […]

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पितृपक्षमें शुभ कर्म क्यों नहीं करने चाहिए ?


ऐसे श्राद्ध कर्ममें तृप्त एवं अतृप्त दोनों ही पितर आते हैं इसलिए आश्रम परिसरका वातावरणमें नकारात्मकता आ गयी थी जिसे हमने उस यन्त्रके प्रयोगसे दिखाया और जैसे ही ब्राह्मण सर्व पितृ कर्म करवाकर भोजन कर चले गए तो वातावरणका परिसर पुनः….

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सूख रहे वस्त्रोंको रात्रिमें छतपर ही सूखने हेतु न छोड दे!


आजकल अनेक लोग अपने घरमें सूख रहे वस्त्रोंको रात्रिमें छतपर ही सूखने हेतु छोड देते हैं । ऐसा करना अनुचित है; क्योंकि रात्रिके कालमें अनिष्ट शक्तियां विचरण करती हैं और उन्हें हमारे वस्त्रोंसे हमारा वलय ज्ञात हो जाता है, ऐसेमें वे हमपर…………

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धर्मकी सेवामें असुर विघ्न डालते हैं !


जून २०१६ में मैंने अपने श्रीगुरुको पूछा था कि उपासनाके प्रत्येक उपक्रममें अनिष्ट शक्तियां इतना अधिक विघ्न उत्पन्न क्यों करती हैं ? हमारा कार्य तो अभी नगण्य समान ही है ! मैंने यह प्रश्न इसलिए पूछा था क्योंकि मुझे लगा कि यदि मुझसे कोई चूक हो रही हो तो मैं उसमें सुधार कर सकती हूं […]

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सूक्ष्म जगतमें कार्यरत रहकर सेवा करना अति दुष्कर !


पिछले दो वर्षोंसे सर्दीकी ऋतुने मुझे बताया कि मेरा स्वास्थ्य कितना बिगड चुका है | वर्ष २०१७ की सर्दीमें देहलीमें थी, तभी मेरे लिए वे दो माह निकालना बहुत कठिन…..

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अपने घरकी रंगाई-पुताई प्रत्येक वर्ष करें 


वर्तमानकालमें सभीके घरोंमें आधुनिक उपकरण एवं अन्य वस्तुओंका प्रमाण अत्यधिक होनेके कारण अनेक लोग घरकी रंगाई-पुताई ऐसे रंगसे (पेंटसे) करते हैं जिससे वे अनेक वर्षोंतक गन्दे न हों और उन्हें प्रत्येक वर्ष रंगाई-पुताईका श्रम न करना पडे । मैंने अपने सूक्ष्म शोधसे पाया है कि गोबरकी पुताईके पश्चात चूनेकी पुताई सबसे सात्त्विक होती है, शेष […]

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