संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

सज्जन और दुर्जनकी क्या परिभाषा क्या है ?


कुछ लोग पूछते हैं कि सज्जन और दुर्जनकी क्या परिभाषा क्या है ? उनके उत्तरके अनेक शास्त्र वचनोंमें यह शास्त्र वचन उनके उत्तरका कुछ अंश अवश्य इंगित करता है ।   विद्या विवादाय धनम् मदाय, शक्तिः परेशाम् परपीडनाय । खलस्य साधोर्विपरीतमेतद ज्ञानाय, दानायचरक्षणाय ॥ अर्थ : विद्या विवादके लिए, धन मदके लिये, शक्ति दूसरोंको सतानेके […]

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ११)


पूजा घरकी स्थूल शुद्धि करें अर्थात वहां स्वच्छता एवं व्यवस्थितता रखें, इस हेतु हमने धर्मप्रसारके मध्य लोगोंके घरोंमें जो पूजा घरमें चूकें होती देखी है, वह बताती हूं, आप भी निरिक्षण करें, कहीं आपसे जाने-अनजाने ऐसी चूकें तो नहीं हो रही हैं….

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – १०)


पूजासे पूर्व नित्य शंख फूंकनेसे आसुरी शक्तियोंका वास वास्तुमें नहीं होता है और यदि कोई अनिष्ट शक्ति वास्तुमें पहलेसे रह रही हो तो वह भाग जाती है । इससे वास्तुकी अशुद्धियां दूर होती है….

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ९)


ईश्वरने इस ब्रह्माण्डका सृजन कर, उसे सुचारू रूपसे चलाने हेतु देवताओंको कार्यभार सौंपा है, उनके प्रति अपनी दिनचर्याके मध्य कृतज्ञता व्यक्त करना न भूलें । पञ्चोपचारसे अपने पूजाघरमें नित्य पूजन कर, देवताओंके प्रति अपनी कृतज्ञता…

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ८)


उत्तर-पूर्व (ईशान कोण), यह दिशा शेष सभी दिशाओंमें सर्वोत्तम दिशा मानी जाती है । वास्तु अनुसार घरमें इस स्थानको ईशान कोण कहते हैं । भगवान शिवका एक नाम ‘ईशान”’ भी है । यद्यपि भगवान शिवका आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशामें होता है; इसीलिए इस दिशाको ईशान कोण कहा जाता है । इस दिशाके स्वामी ग्रह बृहस्पतिऔर केतु […]

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नदियोंकी स्वच्छता हमारा परम धर्म


दो दिवस पूर्व जब नर्मदा स्नानपर हेतु स्थित घाटपर गई तो घाटका जल इतना अशुद्ध था कि वहां स्नान करनेकी इच्छा नहीं हो रही थी । वहां लिखा हुआ था कि घाटपर साबुनसे स्नान न करें एवं वस्त्र धोएं नहीं; किन्तु मूढ और स्वार्थी हिन्दू वह सब करते हैं….

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ७)


अपने घरमें ईशानकोण हम घरके उत्तर-पूर्वी भागको कहते हैं । ज्योतिष शास्त्रमें इस कोणका अपना विशिष्ट महत्त्व है । हमारे घरके इस कोणपर गुरु ग्रह, बृहस्पतिका आधिपत्य है । वास्तुशास्त्र अनुसार….

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ६)


घरके परदे, चादरें तकिएके खोलकी (कवरकी) नियमित स्वच्छता करें । यह गहरे रंग या काले रंगके न हो, इसका ध्यान रखें….

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ५)


अपने अन्नपूर्णा कक्षको (रसोई घरको) भी स्वच्छ रखें । चूल्हेकी स्वच्छतासे प्रशीतक (फ्रिज) तक, सभी वस्तुओंकी स्वच्छतापर ध्यान दें । अनावश्यक वस्तुको एकत्रित कर न रखें, अन्नपूर्णा कक्ष अर्थात माता अन्नपूर्णाका देवालय (मन्दिर) ही होता है….

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आजके विद्यालय केवल बाह्य शिक्षा देते हैं


आजके अधिकांश विद्यालय बाह्य रूपसे विद्या अर्जनकी नित्य नई योजनाएं प्रस्तुत करते रहते हैं और उसे क्रियान्वित करते रहते हैं; परन्तु पूर्ण व्यक्तित्त्व विकास हेतु मनकी एकाग्रता, नैतिकता और ब्रह्मचर्यका पालन, यह कैसे आत्मसात करें ? यह कोई विद्यालय नहीं सीखाता; परिणामस्वरूप ऐसे प्रतिष्ठित विद्यालयके विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रोंके शीर्षपर तो पहुंच जाते हैं; किन्तु इन […]

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