संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

आध्यात्ममें चरित्रवान होना आवश्यक है !


कुछ समय पूर्व हमारे आश्रममें एक युवा विवाहित स्त्री आश्रममें राजस्थानसे आई थीं और साथ ही एक और युवा पुरुष गुजरातसे आश्रममें आए थे, वे दोनों एक दूसरेसे ‘फेसबुक’के माध्यमसे पहलेसे ही परिचित थे । आश्रमके साधकोंने बताया कि कई बार दोनों आश्रमके एक कक्षका द्वार बन्द कर, कुछ बातें किया करते थे और यह उन्हें अच्छा नहीं लगा…..

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विवाह रूपी यज्ञकर्मका अनादर न करें !


विवाह एक यज्ञ कर्म है; अतः उसमें सात्त्विक आचरण कर उपस्थित रहना चाहिए । किन्तु विवाहका आध्यात्मिक महत्त्व न जाननेके कारण वरपक्षके लोग जब विवाहमें सहभागी होने जाते हैं तो उनमेंसे कई मद्यपान कर लेते हैं; इससे उन्हें उस यज्ञका लाभ नहीं मिलता है और उनकी उपस्थितिसे यज्ञका वातवरण भी दूषित होता है । इसप्रकारका […]

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घर आए सभी अतिथियोंका प्रेमभाव से आतिथ्य करें


हमारे घर, माता-पिताके मिलनसार स्वाभावके कारण अतिथियोंका तांता लगा रहता था जैसे किसीको परीक्षा देनी हो, किसीको बस या ट्रेन लेनी हो, किसीको अपनी अपनी चाकरीके लिए उस नगरमें रहकर कुछ दिवस प्रयास करना हो…..

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आजकी निर्लज्ज पीढी


पूर्वकालमें वासनान्ध पुरुष वैश्यालयमें रात्रिके समय जिन तामसिक गीतोंको सुननेके लिए मुंह छुपाकर जाते थे, आज उसे सब अपनी बहू-बेटियोंके साथ अपने घरमें निर्लज्ज होकर देखते हैं और उसे हमने ‘आइटम सॉन्ग’का नाम दिया है । यदि इसे ही आधुनिकता कहते हैं, तो धिक्कार है ऐसी निर्लज्ज आधुनिकताको !

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‘संस्कृतनिष्ठ हिन्दी’ भाषाके मूल स्वरुपको नष्ट करनेवाले ‘बुद्धिजीवी’ कहलानेके अधिकारी नहीं हैं !


लगता है हमारे देशके कुछ तथाकथित हिन्दू बुद्धिजीवी वर्गने हिन्दी भाषाके भ्रष्टीकरणका बेडा उठा लिया है ! जब भी किसी पत्रिका या समाचारपत्रको पढती हूं, या कोई समाचार वाहिनीमें (चैनलमें) समाचार सुनती हूं तो एक वाक्यमें चारसे आठ उर्दू एवं अन्य अंगलभाषाके शब्द उसमें दिखाई देते हैं….

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सनातन धर्मके विवाह सम्बन्धी नियम प्रगत अध्यात्मशास्त्रपर आधारित


सनातन धर्ममें सगोत्र विवाह एवं निकट सम्बन्धीमें विवाहको मान्यता प्राप्त नहीं थी, लीजिए अब वैज्ञानिक इस बातकी पुष्टि कर रहे हैं कि जिनके यहां निकट सम्बन्धीमें विवाह होता है, उनके बच्चोंमें जन्मदोष होता है…..

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त्यौहारोंको मनोरंजनका साधन न समझें !


धर्मशिक्षणके अभावमें आज हिन्दुओंको सभी व्रत-त्यौहार ईश्वरप्राप्तिके साधन नहीं, वरन मनोरंजनके माध्यम प्रतीत होते हैं । कल ही एक ‘फेसबुक’पर विदेशके एक मन्दिरमें दुर्गापूजाके समय होनेवाले स्त्रियोंके नृत्य देखकर लगा कि वे नृत्य मां दुर्गाकी आराधना हेतु नहीं अपितु अपनी किसी सखीके विवाहमें स्वयं एवं अन्योंके मनोरंजन हेतु नृत्य कर रही हों । (२८.१०.२०१४)

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स्त्रियां सात्त्विक श्रृंगार करें


आजकल अनेक स्त्रियां बहुत ही गहरे रंगकी जैसे लाल, जामुनी, भूरा इत्यादि रंगकी ‘लिपस्टिक’ लगाती हैं । सर्वप्रथम यह जान लें कि कृत्रिम पदार्थोंसे बनी लिपस्टिक लगानेसे हमारे मुखकी सात्त्विकता नष्ट होती है एवं आसुरी शक्तियां आकृष्ट होती हैं……

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वैदिक संस्कृतिमें प्रचलित वस्त्र धारण करें !


यदि कोई आपको एक हाथवाला कुर्ता धारण करने हेतु कहे तो आप उसे क्या कहेंगे, कोई आपको फटी हुई साडी भारी मूल्योंमें क्रय करने हेतु कहे तो आप क्या करेंगे ? यदि कोई आपको आडे-टेढे कटे हुए वस्त्र धारण करने दें, तो आप क्या करेंगे ?……

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भोजन सम्बन्धी संस्कार व योग्य दृष्टिकोण


‘उपासना’के आश्रममें भारतके साथ विश्वके कई देशोंसे जिज्ञासु एवं साधक आते रहते हैं, उसी क्रममें मैंने पाया कि अधिकांश आगन्तुकोंके भोजन ग्रहण करने सम्बन्धी संस्कार अति तीव्र होते हैं एवं भोजनके प्रति आध्यात्मिक दृष्टिकोणका पूर्ण रूपेण अभाव होता है……

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