पिछले कुछ माहमें कुछ पुलिसके अधिकारीयों, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षकोंने आत्महत्या की है और इस समाचारने सभीको आश्चर्यचकित कर दिया; क्योंकि ये सभी अपने-अपने व्यावसायिक क्षेत्रमें सफल एवं सुप्रसिद्ध थे……
अनेक लोग अपने पुत्रकी, जो या तो कोई मनोरोगी होता है या किसी व्यसनका दास होता है, उसका विवाह किसी युवतीसे करा देते हैं कि विवाहके पश्चात उसमें अपेक्षित सुधार आ जाएगा; किन्तु ऐसे माता-पिता यह नहीं समझते हैं कि वे ऐसा करके एक स्त्रीका जीवन नारकीयकर, पापके भागी बनते हैं । जिस पुत्रको उन्होंने […]
ख्रिस्ताब्द २००९ में एक बार धर्मप्रसारके मध्य मैं झारखण्डके एक ग्राममें देवालयकी (मन्दिरकी) स्वच्छताकी सेवा कुछ बाल एवं युवा साधकोंके साथ कर रही थी । सेवा समाप्त होनेवाली थी कि अकस्मात मुझे कुछ आवश्यक कार्यसे दस मिनिटके लिए उस प्रांगणसे बाहर जाना पडा……
जबसे इन्दौरमें आई हूं किसी न किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रमोंमें जाना हो रहा है । मुझे लगा था कि तीर्थक्षेत्रोंके मध्य यह नगरी है; इसलिए यहांके लोगोंको धर्मका ज्ञान अधिक होगा, किन्तु मुझे यह देखकर बहुत क्षोभ होता है कि यहां भी देहली और मुंबई समान मुख्य अतिथि, सूत्र संचालक एवं मंचपर आसीन होनेवाले […]
कुछ दिवस पूर्व इन्दौरके एक सामाजिक कार्यक्रममें गई थी । मंचपर दीप प्रज्ज्वलन हेतु २५ लोग थे ! वैसे ही मंचपर माला पहनने और पहनाते हुए छायाचित्र खिंचवाने हेतु भी होड लगी हुई थी ! मंचपर इतनी कुर्सियां थीं कि मंचकी शोभा ही समाप्त हो गई थी ! आजके सामजिक कार्यक्रमोंमें भी लोग मात्र अपने […]
अगस्त २००२ में मैं वाराणसीमें धर्म प्रसारकी सेवा करती थी । एक दिवस, विद्यार्थियोंके लिए नगर स्तरीय एक प्रतिस्पर्धामें जो छात्र उत्तीर्ण हुए थे, उनका पुरस्कार वितरण समारोह था…..
क्या आपको ज्ञात है कि आज अधिकांश वृद्धाश्रमोंमें नगरों एवं महानगरोंके ही वृद्ध क्यों रहते हैं ? नगरों एवं महानगरोंमें रहनेवाले दम्पति सम्पूर्ण दिवस धन अर्जित करनेमें व्यस्त रहते हैं एवं घरपर आनेके पश्चात् या तो समाजमें उनकी प्रतिष्ठा कैसे बढे, इस हेतु वे समाजमें सम्पर्क बढाने हेतु पार्टियोंमें जाते हैं या दूरदर्शन संचमें कार्यक्रम […]
यदि कोई एक शिक्षित व्यक्ति भ्रष्टाचार करे तो उस व्यक्तिका दोष हो सकता है; किन्तु यदि समाजमें अधिकांश शिक्षित वर्ग भ्रष्टाचार करने लगे , राष्ट्रके शत्रुओंकी स्तुति करे, धर्मद्रोह करे तो वह शिक्षित या बुद्धिजीवी कैसे……
हमारे हिन्दू धर्ममें विद्यार्थी जीवनमें ब्रह्मचर्यका इतना महत्त्व था कि चार आश्रम व्यवस्थाका (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यासका) धर्म सिद्धान्त प्रतिपादन करते समय विद्यार्थीकालके अवस्थाको ‘ब्रह्मचर्य अवस्था’का नाम दिया गया…..
कुछ दिवस पूर्व एक सामाजिक जालस्थानपर एक छोटीसी बालिकाद्वारा (आयु तीनसे चार वर्षके होगी) किसी प्रसार वाहिनीके ‘लाइव डांस शो’के चयन हेतु अश्लील हिंदी चित्रपटके गीतपर अश्लील नृत्य करते देखा, जिसे देखकर मंचासीन न्यायाधीश एवं उसके माता-पिता फूले नहीं समा रहे थे ! उस नन्हींसी बच्चीको इस प्रकार नृत्य करते देख, सूक्ष्मसे ज्ञात हुआ कि […]