आजकल सम्पूर्ण भारतमें गेहूंके आटेके रोटी बनानेके प्रचलन है । अनेक स्त्रियोंके हाथकी रोटी यदि थोडी भी ठंडी हो जाए तो वह कडी हो जाती है एवं खींचनेपर ही टूटती है अर्थात वह मुलायम नहीं होती है; ऐसा मैंने पाया है; क्योंकि वे आटेको ठीकसे गूंदती नहीं……
मैंने आजकल अनेक स्त्रियोंको पाक कलामें भी निपुणता नहीं है, ऐसा देखा है; इसलिए यह लेख शृंखला आरम्भ कर रही हूं ! भोजन पकाना और उसे अपने परिजनों एवं अतिथिको खिलाकर उन्हें तृप्त करना, यह एक स्त्री सुलभ गुण है जिसमें आज भारी……….
हमारी वैदिक संस्कृतिमें गृहस्थ भोजन करनेसे पूर्व अपने गृहके बाहर खडे होकर अथितिकी राह देखते हैं, यदि कोई आ जाए तो उसे भोजन आदिसे तृप्तकर, तब भोजन करते थे; परंतु आज यदि भोजनके समय कोई अतिथि आ जाए तो उनके सामने झूठी मुस्कानके साथ उनके भूखे जानेकी ईश्वरसे प्रार्थनाकर, प्रतीक्षा करते हैं | वाह ! […]
क्या आप इस लज्जास्पद तथ्यको जानते हैं कि हमारा आध्यात्मिक भारत देश, मांसाहारकी ओर प्रवृत्त हो रहा है ? सवा आठ कोटिकी जनसंख्यावाला जर्मनी, जनसंख्याकी दृष्टिसे यूरोपका सबसे बडा और सम्पन्नताकी दृष्टिसे भी एक सबसे अग्रणी देश है, यूरोपमें सर्वोच्च जीवनस्तरवाले देशोंके एक सर्वेक्षणमें वह २०१६ में तीसरे नंबरपर था । सम्पूर्ण रूपसे मांसाहारी संस्कृति […]
आजकल अनेक लोग सत्संग-प्रवचनमें या मंदिरमें या कोई व्रत-पूजा, धार्मिक अनुष्ठान इत्यादिमें भी पाश्चात्य वस्त्रको पहनकर जाते हैं, जैसे स्त्रियां जींस और टी शर्ट पहन लेती हैं और पुरुष पेंट-शर्ट पहन कर जाते हैं ! ऐसे सभी लोगोंको बताना चाहेंगे कि कमसे कम सात्त्विक कार्यक्रममें तो भारतीय परम्परा अनुसार वस्त्र पहनकर जाया करें; क्योंकि सात्त्विक […]
धर्मप्रसारके मध्य उत्तर प्रदेशके एक नगरमें मैं २००२ में एक परिवारमें दो दिन रहा करती थी और शेष दिवस अन्य कुछ आस-पासके जनपदोंमें जाती थी । छ: माह पश्चात एक दिवस…..
संस्कृत देवभाषा है । यह सभी भाषाओंकी जननी है । विश्वकी समस्त भाषाएं इसीके गर्भसे उद्भूत हुई हैं। वेदोंकी रचना इसी भाषामें होनेके कारण इसे वैदिक भाषा भी कहते हैं । संस्कृत भाषाका प्रथम काव्य-ग्रन्थ ऋग्वेदको माना जाता है । ऋग्वेदको आदिग्रन्थ भी कहा जाता है । किसी भी भाषाके उद्भवके पश्चात इतनी दिव्य एवं […]
गृहस्थो ! अपने बच्चोंको संस्कारित करने हेतु उनके विद्यालयीन अवकाशके समय उन्हें साथ लेकर किसी सन्तके आश्रममें जाकर सेवा करें, इससे आपकी सन्तानोंमें दिव्य गुण आत्मसात होंगे । आश्रम जीवको कुछ भी यदि….
‘वैदिक उपासना पीठ’के आश्रममें उच्च शिक्षित (मैकाले पद्धतिसे शिक्षित) युवा एवं युवती, देश-विदेशसे आते रहते हैं; किन्तु मैंने पाया है कि वे आजके शिक्षण पद्धति अनुसार, जो भी प्रचलित तथ्य है, उसे वे त्वरित स्मरणमें रख लेते हैं; किन्तु आरतीके समय गाए जानेवाले कुछ श्लोक या मन्त्र या भोजन मन्त्र प्रतिदिन दो या तीन बार […]
इस लेखको लिखनेके पीछे किसी भी संस्कृति या सभ्यताकी आलोचना करना मेरा हेतु नहीं है, अपितु वैदिक सनातन धर्मका प्रसार सर्वत्र क्यों होना चाहिए ?, यह मूल उद्देश्य है । धर्माभिमान एवं योग्य दृष्टिकोणके अभावमें अनेक भारतीय विदेशी संस्कृति और सभ्यताकी स्तुति करते नहीं थकते हैं; इसलिए अपने अनुभव इस लेखके माध्यमसे साझा कर रही […]