चित्रपटोंमें यह दिखाया जाता है कि प्रातःकाल उठनेके पश्चात, उसमें अभिनय करनेवाले कलाकार बिना मुख धोए अपनी स्त्री या पत्नी या सेवकके (नौकर उर्दू शब्द है) हाथोंका बना चाय पीते हैं । अधिकांश हिन्दू भी अपने विवेकको ताकपर रख, बिना कुल्ला तक किए उस तमोगुणी विषका पान करते हैं और उसके पश्चात अनेक रोगोंसे ग्रसित […]
विदेशमें जाकर बसनेवाले अधिकांश हिन्दुओंमें अपने देशके प्रति प्रेम और निष्ठाकी कमी होती है, यह सुनकर विदेशमें रहनेवाले कुछ हिन्दुओंको दुःख होगा; किन्तु मैंने ऐसा पाया है कि जो संस्कार आपमें है…
पाश्चात्य देशोंका यदि खरा इतिहास पढा जाए तो ज्ञात होगा कि उनके यहां स्त्रियोंको पशु समान भी नहीं देखा जाता था, विवाहरुपी संस्था तो उनके यहां थी ही नहीं, इससे ही उस समाजमें स्त्रीका क्या स्थान होगा…
यूरोपमें रहनेवाले हिन्दुओंने अनेक बार मुझसे कहा कि यहां वृद्धों और दिव्यांगोंका, शासन बहुत अच्छेसे देखभाल करता है, उन्हें बहुत सुविधाएं देता हैं, इस बातकी वे स्तुति करते नहीं थकते थे । मैंने सोचा इन सबको योग्य दृष्टिकोण मिलना….
जुलाई २०१३ में हम कुछ साधक जर्मनीसे इटली कारयानसे आ रहे थे । मैंने कुछ स्थानोंपर देखा कि वहांके कुछ वृक्षोंमें फल लदे हुए हैं और नीचे भी भिखरे पडे हैं ! ये वृक्ष घरके परिसरमें होते थे । मैंने एक साधकसे जिज्ञासावश पूछा….
वर्ष २०१३ में मैं इटलीमें एक जिज्ञासुके घरपर रुकी थी । विदेशमें रहनेवाले अधिकांश हिन्दुओं समान, वे भी वहांकी प्रत्येक वस्तुकी स्तुति करते नहीं थकते थे । एक दिवस उन्होंने कहा, “यहांकी एक और अच्छी बात यह भी है कि हम एक साथ….
विदेशमें कुछ लोगोंको लगता है कि यदि वे प्याज-लहसुन नहीं खाते हैं तो उनका भोजन शुद्ध होता है । मैं फरवरी २०१३ में दुबईमें एक परिवारमें रुकी थी, वे प्याज-लहसुन भी नहीं खाते थे और उसका उन्हें बहुत अहम् भी था….
विदेशमें रहनेवाले उच्च स्तरके हिन्दू साधकोंमें रज-तमके आवरणके कारण उनमें अत्यधिक प्रमाणमें स्मरणहीनता दिखाई देती है । सबसे आश्चर्यकी बात यह है कि मायासे सम्बन्धित सर्व तथ्यमें वे अत्यधिक चतुर होते हैं अर्थात उनकी ग्रहण शक्ति, स्मरण शक्ति अच्छी होती है….
अनेक बार कुछ अहिन्दू धर्मद्वेषके कारण एवं कुछ हिन्दू अज्ञानतावश कहते हैं कि हिन्दू धर्ममें अनेकों व्रत-त्योहार एवं धार्मिक उत्सव हैं, जो हमें व्यर्थ लगता है ! यथार्थमें हमारे धर्ममें, वर्षके दो तिहाई भागमें कोई-न-कोई व्रत-त्योहार या धार्मिक उत्सव होनेके पीछे अत्यन्त गूढ कारण निहित है । सामान्य गृहस्थके लिए मोह-मायाके बन्धनोंको तोडकर साधना हेतु […]
बच्चोंको मानसिक रोगी बना रहे हैं आजके आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण क्या बच्चा आपकी बात नहीं सुनता ? चिडचिडा हो गया है ? मित्रोंसे भी दूर रहने लगा है ? पढाई व क्रीडामें (खेलकूदमें) उसका मन नहीं लगता ? उसे धुंधला दिखने लगा है ? यदि हां, तो उसे तुरन्त विशेषज्ञ चिकित्सकको दिखाएं; क्योंकि बच्चोंके मस्तिष्कपर […]