संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ४)


अपने भण्डारकक्षको (स्टोररूम) सदा व्यवस्थित रखें, उसमें सूर्यका प्रकाश एवं हवा हेतु समय-समयपर वातायन (खिडकी) अवश्य खोलें । अनेक बार मैंने पाया है कि अनिष्ट शक्तियां घरके भण्डारकक्षमें अपना स्थान बनाकर…..

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ३)


घरमें नियमित रंगाई-पुताई करवाएं । आदर्श स्थितिके अनुसार प्रत्येक वर्ष दीपावलीके समय रंगाई-पुताई अवश्य करवानी चाहिए; किन्तु आजकल ऐसे कृत्रिम रंग (केमिकल पेंट्स) आ चुके हैं कि पांच-सात वर्षोंतक पुताई प्रति वर्ष करवानेकी….

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – २)


आजकल अनेक लोग यन्त्रोंसे स्वच्छता करते हैं तो ऐसी स्वच्छतासे वास्तुमें तमोगुणका प्रमाण बढ जाता है; अतः जहांतक सम्भव हो बिना आधुनिक वैज्ञानिक यन्त्रोंके, पारम्परिक पद्धतिसे अर्थात झाडू दें…..

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घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – १)


हिन्दू धर्ममें मनुष्यकी चार अवस्थाओंके अनुरूप चार आश्रमोंका प्रतिपादन किया गया है, संसारमें रहकर अपना जीवन व्यतीत करनेवालेको भी आश्रमवासीकी संज्ञा देते हुए उन्हें गृहस्थाश्रमी कहा गया है; किन्तु धर्मशिक्षणके अभावमें….

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नीचे बैठकर पालथी मारकर करें भोजन


पाश्चात्योंका अनुकरण कर आज अनेक हिन्दू आसन्दी (कुर्सी) और पटलपर भोजन करते हैं; किन्तु यह आचारधर्म और  शरीर प्रकृतिके विरुद्ध आचरण है । नीचे बैठकर खाते समय जब हम पालथी मारकर बैठते हैं तो हमारा शरीर लचीला रहता है अर्थात भूमिपर बैठकर भोजन करते हैं, तब शरीरको आगेकी ओर झुकाते हैं और पुनः सीधी मुद्रामें […]

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धर्मधारा


किसीकी सुनी सुनाई बातोंपर विश्वास कर, किसीके प्रति वैरभाव या दुराग्रह निर्माण नहीं करना चाहिए ।

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धर्मधारा


आजकल माता-पिता अपने बच्चोंको अल्पायुमें ही प्रसिद्धि दिलाने हेतु भिन्न प्रकारकी प्रतियोगितामें उत्तीर्ण करने हेतु, उन्हें नृत्य और संगीतमें प्रवीण करते हैं; किन्तु इससे बच्चोंका बालपन नष्ट हो जाता है । अल्पायुमें ही उनपर तनाव आ जाता है जो आयु, खलेने, खाने और उधम-चौकडी करनेकी होती है, उसमें वे सम्पूर्ण दिवस भिन्न प्रकारकी प्रतियोगिता जीतने […]

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धर्मधारा


सुन्दर बाह्य व्यक्तित्व कुछ समयके लिए किसीको प्रभावित कर सकता है; किन्तु गुणसे युक्त व्यक्तिका सम्पूर्ण संसार गुणगान करता है और उसके गुण जितने दैवी होते हैं, वह व्यक्ति उतने अधिक कालतक स्मरण किया जाता है; अतः दैवी गुणोंको आत्मसात करना चाहिए ।

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विदेशमें रहनेवाले हिन्दुओंकी दु:स्थिति, कारण एवं निवारण (भाग – ७)


विदेश जानेपर अधिकांश हिन्दू अपनी पारम्परिक वेशभूषाका सर्वप्रथम परित्याग कर देते हैं और विदेशी पाश्चात्योंका वस्त्र धारण करनेमें गर्व अनुभव करते हैं ! वैसे आज भारतमें भी स्थिति कुछ ऐसी ही है ! विदेशमें अधेड आयुकी स्त्रियां….

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धर्मधारा


फिनलैण्डमें हुई ‘आईएएएफ वर्ल्ड अण्डर-२० ऐथलेटिक्स चैम्पियनशिप’में १८ वर्षकी भारतीय धावक हिमा दासने इतिहास रच दिया ! उन्होंने महिलाओंके ४०० मीटर अन्तिम (फाइनल) दौडमें ५१.४६  सेकण्ड समय निकालते हुए प्रथम स्थान प्राप्त कर…

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