श्रीगुरु उवाच

श्रीगुरू उवाच


राजकीय पक्षोंके कार्यकर्ताओंको अपने स्वार्थ हेतु उनके पक्षका शासन हो, यह अपेक्षा होती है तो साधकोंको सभीका हित हो, इस हेतु ईश्वरीय (धर्म) राज्यकी अपेक्षा होती है ।

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श्रीगुरू उवाच


निस्वार्थी धर्माभिमानी ही कर सकते हैं आदर्श राष्ट्रकी स्थापना ‘येन-केन-प्रकारेण’ अर्थात कुछ भी कर चुनाव जीतना, इतना ही स्वार्थी राजनीतिज्ञोंका ध्येय होता है; अतः वे आदर्श राज्यकी स्थापना नहीं कर सकते हैं । इसके विपरीत हिन्दू राष्ट्रकी अर्थात आदर्श धर्मराज्यकी स्थापना करना, यह धर्माभिमानका ध्येय होता है; इसलिए वे ही हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना कर सकते […]

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अधिकतर पुजारियोंद्वारा होनेवाली देवालयके देवोंकी मूर्तियोंकी ‘अतिपरिचयात् अवज्ञा’


अधिकतर पुजारियोंद्वारा होनेवाली देवालयमें देवताओंकी मूर्तियोंकी ‘अतिपरिचयात् अवज्ञा’ ‘देवालयके पुजारी वहांकी मूर्तियोंके सन्निकट वर्षोंसे सातत्यसे रहते हैं; इसलिए वे अधिकतर यन्त्रवत हो जाते हैं । ‘अतिपरिचयात् अवज्ञा’ अर्थात अतिपरिचयसे अनादर होता है, इस सिद्धान्तानुसार उनका वर्तन भी देवताओंकी मूर्तियोंके सन्दर्भमें वैसा ही होता है । इसके विरुद्ध, देवालयमें आए कुछ भक्तोंका भाव क्षणभरके दर्शनसे भी […]

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हिन्दू धर्मानुसार साधना करनेवालेकी प्रगति शीघ्र होनेका एक कारण   


प्रत्येक व्यक्तिका धनप्राप्तिका मार्ग भिन्न-भिन्न होता है, उसीप्रकार ईश्वरप्राप्तिका मार्ग भी भिन्न-भिन्न होता है । यह वैशिष्ट्य मात्र हिन्दू धर्ममें ही है; इसलिए हिन्दू धर्मानुसार साधना करनेपर प्रगति शीघ्र होती है । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

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लिपिक निर्माण करनेवाली शिक्षणपद्धति परिवर्तित कर धर्माधिष्ठित शिक्षणपद्धतिका अवलम्बन करना आवश्यक !  वर्तमान कालकी रसातलमें ले जानेवाली शिक्षणव्यवस्था, एक चिन्ताका विषय बन चुकी है । अंग्रेजोंने हिन्दुओंका तेजोभंग करनेके लिए प्रभावी गुरुकुल शिक्षणपद्धति बन्दकर, मैकाले प्रणित शिक्षणपद्धति आरम्भ की । दुर्भाग्यसे स्वतन्त्रतोपरान्त कालमें राज्यकर्ताओंने इसी शिक्षणपद्धतिको आगे भी यथावत बनाए रखा । आजकल बालकोंको सिखाए […]

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नामजप अच्छेसे होनेके लिए निम्नलिखित प्रयत्न करें – १. जप बैठकर न होता हो तो, चलते-फिरते करें ! २. जप करते हुए मनमें अन्य विचार प्रवेश कर रहे हों तो, जप वैखरी वाणीसे अर्थात मुखसे बोलकर करें ! इससे जपपर ध्यान केन्द्रित करनेमें सहायता होती है । ३. भावजागृति हेतु जप मनमें शान्तिसे करें ! […]

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हिन्दू राष्ट्रमें सर्व विधान (कानून) धर्माधिष्ठित होंगे; इसलिए उनमें परिवर्तन नहीं करने पडेंगे एवं उनके पालनसे अपराध घटित नहीं होंगे एवं साधना भी होगी !

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किसी विषयके सन्दर्भमें पाश्चात्य विचारधारा तथा सनातनी विचारधारामें भेद हो, तो सनातनी विचारधाराको सत्य समझें । इसका कारण यह है कि सनातनी विचारधारा अनेक लक्ष वर्षोंसे है । उदा. सूर्यस्नान कब करें ?, इसका समय पाश्चात्य प्रातः १० बजेके पश्चात बताते हैं, तो हिन्दू धर्ममें प्रातःकालकी मध्यम किरणें अर्थात प्रात: ९ बजेके पूर्वका समय बताया […]

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हिन्दुत्ववादियो, छोटी प्रासंगिक बातोंमें भावनात्मक रूपसे न अटकते हुए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाहेतु सर्व शक्ति लगा दें ! कई बार किसी गाय अथवा मन्दिरके रक्षणार्थ या हिन्दुओं सम्बन्धित किसी क्रोध निर्माण करनेवाले प्रसंगके कारण हिन्दुत्ववादी ऐसी कोई कृति करते हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें कुछ माह या कुछ वर्ष कारागृहमें रहना पडता है । उन्हें यह ध्यानमें […]

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मानसिक नहीं, आध्यात्मिक स्तरकी शिक्षा देनेवाला धर्म ! हिन्दू धर्मके अतिरिक्त अन्य सभी धर्म मानसिक स्तरके हैं । उनमें आध्यात्मिक स्तरकी सीख अत्यल्प है ।  

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