अध्यात्म एवं साधना

पथभ्रष्ट न हो, इस हेतु कुछ दिवस गुरुकेद्वार जाएं


सांसारिक होकर भी ईश्वरप्राप्ति करना है सम्भव, संसारमें रहकर साधनारत होना न धर्म विरुद्ध है, न शास्त्र विरुद्ध । मात्र ऐसे जीवकी अपने ध्येयसे भटकनेकी आशंका अधिक होती है; अतः गृहस्थने गुरुगृहमें, अर्थात् आश्रममें जाकर कुछ समय साधना करना चाहिए ! प्रतिदिन थोडे समय एकान्तमें रहकर अपनी साधनाकी समीक्षा करना चाहिए और यथाशक्ति धर्मकार्यमें योगदान […]

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सात्विक क्यों रहनेका प्रयास करना चाहिए ? (भाग – ४)


वर्तमान कालमें व्यभिचारी, बलात्कारी, भ्रष्ट, धूर्त, देशद्रोही एवं धर्मद्रोही लोगोंकी संख्यामें बहुत अधिक वृद्धि हुई है; क्योंकि माता-पिता ठीकसे साधना नहीं करते हैं या करते ही नहीं है । मात्र सात्त्विक माता-पितासे ही सात्त्विक सन्तानोत्पत्ति हो सकती है…..

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सात्विक क्यों रहनेका प्रयास करना चाहिए ? (भाग – ३)


सात्त्विक रहनेसे हमारा सूक्ष्म वलय (प्रभामण्डल) सकारात्मक रहता है, इससे हमारे जीवनमें सुख-समृद्धि स्वतः ही आकृष्ट होती है । मैंने पाया है कि जो सात्त्विक नहीं रहते हैं; चाहे वे कितना भी बहुत स्वच्छ, आधुनिक और बाह्य रूपसे आजकी भाषामें सभ्य (स्मार्ट) दिखे…..

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सात्विक क्यों रहनेका प्रयास करना चाहिए ? (भाग – २)


देवताके तत्त्व सात्त्विक रहनेसे शीघ्र आकर्षित होते हैं, इससे हमारे भीतर दैवी गुणोंको आत्मसात करनेमें सहायता मिलती है । देवत्व निर्माण होनेसे हम अध्यात्ममें शीघ्र आगे जाते हैं और अध्यात्मके अगले चरणोंको साध्य करते हुए हम त्रिगुणातीत हो सकते हैं ।

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सात्विक क्यों रहनेका प्रयास करना चाहिए (भाग – १)


सात्त्विक रहनेसे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है एवं चित्त शान्त एवं बुद्धि विवेकमें परिवर्तित होती है । इससे अध्यात्ममें आगे जानेमें सहायता मिलती है; किन्तु कुछ अज्ञानी इस तथ्यको स्वीकार्य नहीं करते हैं एवं अपने तमोगुणी आचरणका अपने विवेकहीन बुद्धिसे समर्थन करते हैं; फलस्वरूप वे अध्यात्ममें  प्रगति नहीं कर पाते हैं । शीघ्र आध्यात्मिक प्रगति […]

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दिव्यात्माओंके अभिज्ञान हेतु साधना चाहिए


विषयासक्तिविहीन जीवनमुक्त दिव्यात्माएं स्वच्छन्द पंछी समान सम्पूर्ण ब्रह्माण्डमें स्थूल और सूक्ष्म स्तरोंपर विचरण करतीं हैं; परन्तु उनके दर्शन एवं अभिज्ञान (पहचान) हेतु साधनाका ठोस आधार चाहिए !

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सम्पूर्ण अहिंसक कोई नहीं हो सकता


इस ब्रह्माण्डमें किसी भी व्यक्तिद्वारा किसी भी स्थितिमें हिंसा न हो, यह सम्भव नहीं, यह नीचे लिखे शास्त्र वचनको पढनेसे स्पष्ट हो जाएगा; अतः जो सम्प्रदाय यह कहते हैं कि उनसे हिंसा नहीं होती है उनका यह तथ्य भ्रामक है ! देहान पुराणानउत्सृज्यनवानसंप्रतिपद्यते । एवं मृत्युमुखं पराहुर ये जनास कर्मफलर्दर्शिनः ।। अर्थात ये चल एवं […]

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वृत्तिको बाल्यकालसे ही सात्त्विक रखना आवश्यक


मेरे पास एक चिकित्सक आए थे ! वे आधुनिकतामें रंगमें पूर्णत: रंगे हुए थे । आजके अधिकांश मैकाले शिक्षित बुद्धिजीवीको ‘सात्त्विकता’, यह शब्द ज्ञात नहीं है तो एक दिवस जब मैंने सात्त्विक राजसिक और तामसिक भोजन, वेशभूषा और भाषा, वृत्तिकी चर्चा कर रही थी तो उन्होंने कहा, दाल तो दाल होता है इसमें सात्त्विक, राजसिक तामसिक क्या होता है……

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साधकत्वमें वृद्धि कैसे हो


प्रत्येक दिवस स्वयंमें कुछ दिव्य गुणोंको आत्मसात करनेसे साधकत्वमें वृद्धि होती है ।

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साधना एवं धर्माचरण करने हेतु उपाययोजना निकालना सीखें !


आजके अधिकांश व्यक्तियोंमें समस्याओंकी योग्य उपाययोजना निकालनेका अनेक बार अभाव दिखाई देता है और विशेषकर यदि साधना और धर्मपालन करना हो तो उसे कोई उपाय सूझता ही नहीं है । मैं सदैवसे ऐसे सोचती आई हूं कि इस ब्रह्माण्डमें ऐसी कोई समस्या ही नहीं है, जिसका समाधान सम्भव नहीं हो…..

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