बात उन दिनोंकी है जब मीराबाईके पति, उनकी साधनामें अत्यधिक अडचनें निर्माण करने लगे थे । ऐसेमें उनके लिए साधना करना और भी कठिन हो गया ! वे द्वन्द्वमें फंस गई, एक ओर उनका स्त्रीधर्म जो उन्हें पतिसे विमुख होकर साधना करने हेतु रोक रहा था…..
जब कोई साधक समष्टि सेवा अन्तर्गत धर्म प्रसारकी सेवा आरम्भ करता है तो उसकी आध्यात्मिक प्रगति द्रुत गतिसे होने लगती है; क्योंकि कलियुगमें व्यष्टि साधनाका महत्त्व ३०% है और समष्टि साधका महत्त्व ७०% है । ऐसेमें आसुरी शक्तियां ऐसे साधकोंको शारीरिक…..
एक युवा जिज्ञासु जो कुछ दिवसोंसे हमारी संस्थासे जुडे थे, अपने पिताजीके आग्रहपर एक गीतापर भाष्य लिखनेवाले प्रसिद्ध अध्यात्मविदसे मिलने गए । उस युवाने उनसे साधना सम्बन्धित कुछ प्रश्न पूछे, जिनका वे सन्तोषपूर्वक उत्तर तो नहीं दे सके…..
आपातकाल आनेवाला है, यह जानते हुए भी योग्य साधना न करना, यह उसीप्रकार है जैसे मधुमेहके रोगीका यह जानते हुए भी कि अधिक मीठा खानेसे कष्टकी तीव्रता बढ जाएगी और तब भी उसे खाना और उसके पश्चात पछताना ! साधको, आनेवाले भीषणकालमें मात्र और मात्र ईश्वर ही आपकी रक्षा कर सकते हैं, यह जानते हुए […]
जब मैंने ‘उपासना’के माध्यमसे स्वतन्त्र रूपसे लोगोंको साधनासे सम्बन्धित मार्गदर्शन आरम्भ किया तो मुझे ज्ञात हुआ कि स्वाभावदोष निर्मूलन करवाना, यह कलियुगमें साधना हेतु अति आवश्यक चरण क्यों है ?
यह तो आपको सबको समझमें आ ही गया होगा कि नैसर्गिक आपदाओंको रोकनेकी क्षमता न सामान्य मनुष्यमें है और न ही आजके आधुनिक विज्ञानमें; इसलिए ‘मात्र और मात्र’ आध्यात्मिक…..
जब तक मनका पूर्ण लय नहीं होता तब तक विषय-वासनाओंके संस्कार रहते ही हैं और पूर्ण मनोलयवाले सन्त सम्पूर्ण विश्वमें जितनी हमारी उंगलियां है, उतने भी नहीं हैं !…
‘अध्यात्म त्यागका शास्त्र है’, यह बतानेपर एक पूर्णकालिक साधकने कहा कि मैं तो अपना सब कुछ छोडकर यहां आया हूं, अब मैं क्या त्याग कर सकता हूं ?
यह सत्य है कि एक पूर्णकालिक साधक अपना सुख-ऐश्वर्य, धन, सगे-सम्बन्धी इत्यादि छोडकर आश्रममें आकर साधना करते हैं…
वर्तमान समयमें योग्य साधनाके अभावमें सर्व सामान्य व्यक्तिका जीवन अत्यधिक कष्टप्रद है, जबकि आधुनिक विज्ञानने सुख-सुविधाओंके ढेर लगा दिए हैं; किन्तु आजके वैज्ञानिक साधनोंमें किसी भी व्यक्तिके प्रारब्धके कष्टकी तीव्रताको न्यून करनेकी क्षमता नहीं होती है…
अमावस्या और पूर्णिमाके समय सूक्ष्म अनिष्ट शक्तियोंके कष्टसे पीडित साधकोंके कष्ट बढ जाते हैं; अतः ऐसे दिवसोंके दो दिवस पूर्व और पश्चात भी नामजप और प्रार्थना अधिक करनेका प्रयास करें । विशेषकर चन्द्रका हमारे मनपर अधिक प्रभाव पडता है; क्योंकि वह मनका अधिष्ठाता है । मनके विचार, चन्द्रमाकी स्थितिसे प्रभावित होते हैं; इसलिए जिन्हें मानसिक […]