पूर्वकालके वृद्ध गृहस्थका मुख मण्डल तेजसे चमकता रहता था; क्योंकि वे बाल्यकालसे ही साधना और धर्मपालन करते थे । आजके अधिकांश वृद्ध गृहस्थके मुख तेजसे विहीन होता है और चिन्ताके चिह्न उनके मुखपर स्पष्ट दिखाई देते हैं । ईश्वरपर आस्था न होनेके कारण उन्हें अपन भावी पीढीकी चिन्ता जीवनके अन्तिम अवस्थामें भी सताती है । […]
एक साधकने पूछा है, “आपके गुरु तो सभीको कृष्णका नामजप करनेके लिए कहते हैं और कालानुसार आवश्यक भी है तो आप शिवको अपना आराध्य क्यों मानती हैं ? जब हमने २०१० में उपासनाका कार्य आरम्भ किया, तब तक मैं श्रीकृष्णका ही जप करती थी, उपासनाकी स्थापनाके समय भी मैं श्रीकृष्णका ही जप करती थी, […]
सन्तोंकी दृष्टि अपनी ओर आकृष्ट करने हेतु परिवाद (शिकायत) न करें, अपने प्रयास बढाएं ! आपके प्रयास बढनेपर सन्त मात्र आपको मार्गदर्शन ही नहीं करेंगे, आपके घर तक आकर अपना प्रेम उडेलेंगे…..
एक व्यक्तिने पूछा है कि आप अपने लेखोंमें अनिष्ट शक्तियोंके विषयमें लिखती रहती हैं, क्या आप तान्त्रिक हैं ?
उत्तर बडा सरल है, तुलसीदासजीने हनुमान चालीसामें लिखा है, ‘भूत-प्रेत निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे’ तो क्या ये लिखनेवाले सन्त शिरोमणि तुलसीदासजी तांत्रिक थे ?! कदापि नहीं ! उन्होंने तो हनुमानजीकी विशेषता बताई है; एक सरलसा सिद्धांत जान लें, यदि आप योग्य प्रकारसे साधना करते हैं, तो इष्ट और अनिष्टकी जानकारी साथ-साथ होती है, […]
नामजप यदि भावसहित किया जाए तो वह हमारे प्रारब्धकी तीव्रताको तो नष्ट करता ही है, साथ ही संचित कर्मोंको नष्टकर हमारे लिए मुक्तिके द्वारको खोल देता है; इसलिए आद्य गुरु शंकराचार्य सहस्रनाम भाष्यमें कहते हैं – यन्नामकीर्तनं भक्त्या विलापनमनुत्तमम् । मैत्रेयाशेषपापानां धातूमिव पावकः ।। अर्थात जैसे अग्नि सुवर्ण आदि धातुओंके मलको नष्ट कर […]
आजका गृहस्थ अत्यन्त स्वार्थी हो गया है, उसके पास देव, पितर, समाज किसीके लिए भी समय नहीं होता; परिणामस्वरूप उसका जीवन अत्यधिक वैज्ञानिक सुख-संसाधन होते हुए भी रोग और शोकसे ग्रसित है….
साधकने अपने क्रियामाणसे कभी कोई पापकर्म नहीं करना चाहिए, यह ईश्वरकी दृष्टिमें एक अक्षम्य अपराध होता है ।
अगले दिवसकी दिनचर्याका नियोजन करते समय या दिनचर्या लिखते समय उसमें व्यष्टि साधनाके लिए समयको प्राथमिकता दें, ऐसी दिनचर्यासे आपका मनुष्य जीवन सार्थक होगा । जैसे दिनचर्यामें नामजप, आरती, आत्मनिरीक्षणके लिए समय….
रात्रिमें अपनी अगले दिनकी दिनचर्या लिखकर रखें ! अगले दिवस रात्रिमें अपनी दिनचर्याकी समीक्षा करें और किन दोषोंके कारण आप अपनी दिनचर्याका नियोजन अनुसार पालन नहीं कर पाएं, उन दोषोंसे सम्बन्धित चूकें लिखें….
योग और साधनाका कितना महत्त्व है, यह थाईलैण्डके गुहामें (गुफामें) लगभग एक माह तक फंसे हुए बच्चों और उनके प्रशिक्षकने पुनः सिद्ध कर दिया । मनल करारा, जो उन बच्चोंके प्रशिक्षक थे, वे योग और ध्यानकी साधनासे अभ्यस्त थे । आपात स्थित देखकर उन्होंने बच्चोंको योग और ध्यानकी साधना सिखाई, उनका मनोबल बनाकर रखा और […]