गुरु संस्मरण

श्रीगुरुके प्रति शरणागत होनेके कारण (भाग – ५)


मैं अपने श्रीगुरुसे क्यों जुडी, यह कुछ लोग मुझसे पूछते रहते हैं, तो इस लेख श्रृंखलामें मैं प्रतिदिन आपको एक कारण बताऊंगी……. मई १९९७ में श्रीगुरुने प्रथम साक्षात्कारके समय ही मुझे सत्संग लेनेके निर्देश दिए । गुरु आज्ञा पालन हेतु मैंने सत्संग लेने आरम्भ किए और समाजको धर्म शिक्षण देने हेतु मेरे श्रीगुरुद्वारा संकलित ग्रन्थोंके […]

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श्रीगुरुके प्रति शरणागत होनेके कारण (भाग – ४)


मैं अपने श्रीगुरुसे क्यों जुडी, यह कुछ लोग मुझसे पूछते रहते हैं, तो इस लेख श्रृंखलामें मैं प्रतिदिन आपको एक कारण बताऊंगी – इस वर्ष समान ख्रिस्ताब्द १९९० में बिहारमें हुए व्यापक स्तरके शैक्षणिक भ्रष्टाचारके कारण मुझे १२ वींकी बोर्ड परीक्षामें ५७ प्रतिशत अंक आये थे | जो विद्यार्थी ९९ अंक आनेपर यह सोच कर […]

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श्रीगुरुके प्रति शरणागत होनेके कारण (भाग – ३)


मैं अपने श्रीगुरुसे क्यों जुडी, यह कुछ लोग मुझसे पूछते रहते हैं, तो इस लेख श्रृंखलामें मैं प्रतिदिन आपको एक कारण बताऊंगी – अगस्त १९९७ में एक दिवस मैं श्रीगुरुके ध्वनिमुद्रित(रिकार्डेड) सत्संग सुन रही थी । उसमें उन्होंने बताया कि अध्यात्ममें २ प्रतिशत ज्ञान शब्दोंके माध्यम एवं ९८ प्रतिशत ज्ञान शब्दातीत माध्यमसे प्राप्त होता है, […]

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श्रीगुरुके प्रति शरणागत होनेके कारण (भाग – २)


मैं अपने श्रीगुरुसे क्यों जुडी, यह कुछ लोग मुझसे पूछते रहते हैं, तो इस लेखमें मैं  प्रतिदिन आपको एक कारण बताऊंगी – विद्यार्थी जीवनमें मुझे सभी विषयोंमें ९८, ९९, या १०० अंक मिला करते थे; इस कारण प्रधानाध्यापक एवं  सभी विषयोंके शिक्षक मुझसे अत्यधिक स्नेह करते थे | अनेक बार वे सब मुझे बुलाकर पूछते […]

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श्रीगुरुके प्रति शरणागत होनेके कारण (भाग – १)


मैं अपने श्रीगुरुसे क्यों जुडी, यह कुछ लोग मुझसे पूछते रहते हैं, तो आजसे प्रतिदिन मैं आपको एक कारण बताऊंगी | मैंने बाल्यकालसे ही दूसरोंके लिए, अपने माता-पिताको त्यागमय जीवन व्यतीत करते हुए देखा था, वह भी आनंदपूर्वक ! मैं अपने आस-पास ऐसे व्यक्तिको ढूंढते रहती थी; किन्तु इसे दैवयोग कहें या और कुछ, मेरे […]

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ऐसे हैं हमारे श्रीगुरु !


न दी दीक्षा, न दिया विधिवत गुरुमन्त्र । एक दृष्टिसे ही डाला हृदयमें अखण्ड नामजपका सूक्ष्म भावयन्त्र ।। देखें ऐसे अनेक गुरु । एकत्रित कर भीड देते हैं गुरुमन्त्र । तथापि न सिखा पाते अध्यात्मका गूढ तन्त्र ।। दे दिया ज्ञान स्थूल और सूक्ष्म अध्यात्मका । दिए बिना ही गुरुमन्त्र ।। हैं ऐसी ऊंचाईपर हमारे […]

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श्रीगुरुकी महिमा


गुरु संस्मरण अ. जब गुरु संस्मरण सुन एक साधकका कष्ट समाप्त हो गया : जनवरी २००१ में मैं, सनातन संस्थाके शिविरमें महाकुम्भमें प्रयाग गई थी । धूल और ठण्डके कारण वहां मुझे अत्यधिक खांसी हो गई और महाकुम्भसे आनेके दो माह पश्चात् तक खांसी ठीक ही नहीं हो रही थी । मैं उस समय धनबाद […]

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भिन्न माध्यमोंद्वारा मेरे स्वास्थयके लिए क्या आवश्यक है, उसे भी उपलब्ध करवाकर देना


सगुण गुरुके निर्गुण निराले माध्यम सूक्ष्म आसुरी शक्तियोंके सतत आक्रमणके कारण वर्ष २००६  से ही प्राणशक्ति ४०  से  ५० % के मध्य रहने लगी थी जिस कारण स्वास्थ्यपर विपरीत प्रभाव पडने लगा | ख्रिस्ताब्द  २०१० से स्वतन्त्र रूपसे ईश्वर आज्ञा अनुरूप ‘उपासना’नामक संस्थाके माध्यमसे धर्मप्रसार आरंभ करनेपर अपनी  शारीरिक क्षमतासे अधिक सेवा करनेके कारण, पर्याप्त […]

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श्रीगुरुके सर्वज्ञता सम्बन्धित कुछ अन्य अनुभूतियां


 श्रीगुरुने पूरे गांवको ही बना दिया साधक  ख्रिस्ताब्द २००२ में  एक दिवस मराठी साप्ताहिक ‘सनातन प्रभात’में ‘साधक कुटुम्ब’, इस स्तम्भके अन्तर्गत साधकका पूरा कुटुम्ब किस प्रकार साधना कर रहा है, उसकी जानकारी पढ रही  थी । मैं अपने कुटुम्बमें अकेली ही साधनारत थी । मैं उस स्तम्भको देख सोचने लगी, मैं अत्यधिक अभागी हूं, मेरे […]

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श्रीगुरुने ऐसे सिखाया मुझे वाहन चलाना


सगुण गुरुके निर्गुण निराले माध्यम ख्रिस्ताब्द १९९९ में मैं झारखण्डके धनबाद जनपदमें धर्म-प्रसारकी सेवा कर रही थी, उस समय वहांपर नगरके एक छोरसे दूसरे छोर तक जाने लिए सहजतासे हाथ-रिक्शाके अतिरिक्त  दूसरा कोई परिवहनका साधन उपलब्ध नहीं था ।  हाथ रिक्शासे एक स्थानसे दूसरे स्थान जानेमें समयका अधिक व्यय तो होता ही था, धनका व्यय […]

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