बुद्धिका होना आध्यात्मिक प्रगतिके लिए तभी पोषक होता है जब उसका अध्यात्मविद या गुरुकी आज्ञाका पालन करने हेतु उपयोग किया जाए | अधिकांश बुद्धिवादियोंमें यह गुण नहीं होता; इसलिए बुद्धि उनकी आध्यात्मिक प्रगतिमें बाधा बन जाती है ! यह न हो; इसलिए अध्यात्ममें हमसे जो आगे हैं उनकी आज्ञा पालन करनेका प्रयास करना चाहिए !
१. साधको, आप जब कुछ दिवसके लिए आश्रममें आते हैं या आश्रमसे जानेका नियोजन करते हैं और आपके पास पर्याय हो तो मध्य रात्रि या प्रातः तीन या चार बजेके वायुयान, रेलयान या बसयानसे यात्रा करना टालें ! यह इसलिए कहा जा रहा है; क्योंकि मैंने देखा है कि आज अधिकांश लोगोंमें दूसरोंका विचार करना, […]
एक बार मेरे एक परिचितने, जो मुझसे आयुमें दस वर्ष बडे थे, अकस्मात मुझसे मिले और मिलते ही मुझे झुककर चरण स्पर्श किया, मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और इसकी कल्पना भी नहीं कर सकती थी, और उनके उस वर्तनसे मुझे बहुत आश्चर्य हुआ, मैंने उनसे कहा, “आप मुझसे आयुमें बडे हैं, आपको इसप्रकार […]
जब भी हम कोई नूतन सेवा करते हैं तो हमसे चूकें होती हैं, इसके पीछे उस सेवाके प्रति अनभिज्ञता एवं हमारे दोष उत्तरदाई होते हैं । कुछ साधक सेवा इसलिए नहीं करना चाहते हैं; क्योंकि उनसे चूकें होंगी और उनकी चूकें या तो उन्हें स्वयं बतानी पडेगी या उन्हें बताया जाएगा । (हमारे श्रीगुरुने हमें […]
ब्रह्मचर्यका अर्थ होता है ब्रह्मको चरना या ब्रह्मकी चर्चा व चर्चामें ही रत रहना । दूसरा अर्थ जो प्रचलित है वह है इंद्रियोंका संयम रखना । विद्यार्थी और संन्यासीका यह कर्तव्य…..
जो लोग अपने जीवनमें धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता नहीं देते हैं, जब उनके जीवनमें विषम परिस्थितियां आती हैं तो ईश्वर भी उनकी सहायता नहीं करते हैं ! सामान्य लोगोंके जीवनमें कष्ट उनके इस जन्म या किसी और जन्मके अधर्मका परिणाम होता है, उसका फल सृष्टिके कर्मफल सिद्धांत अनुसार भोगना ही पडता है, उस नियमको बनानेवाले […]
कुछ लोगोंको लगता है कि उन्होंने जो धन कमाए हैं वह उनके पुरुषार्थके कारण है ! धनका योग प्रारब्धके अनुसार सहज प्राप्त होता है ! यदि वह क्रियामाणसे प्राप्त होता तो एक ही माता-पिताद्वारा संस्कारित या सुशिक्षित सन्तानें जो एक समान क्रियामाणसे प्रयास करते हैं, वे एक समान धनी होते; किन्तु ऐसा होता नहीं है, […]
आश्रमव्यवस्थाका जहां शारीरिक और सामाजिक आधार है, वहीं उसका आध्यात्मिक अथवा दार्शनिक आधार भी है । भारतीय मनीषियोंने मानव जीवनको केवल प्रवाह न मानकर……
मांसाहारसे मांसकी वृद्धिको वैज्ञानिकोंने कर्करोग जैसी व्याधियोंमें ट्यूमरकी वृद्धिके साथ सम्बंधित होनेके प्रमाण पाए हैं I वैज्ञानिकोंके मध्य आहार एवं कर्करोगके मध्यके संबंधको….