हे प्रभु, अभी मैं पूजा करने जा रहा हूं, पूजा पूर्व आप हमारे पूजा-घर, हमारे वास्तु एवं हमारे चारों ओर अभेद्य सुरक्षा कवच निर्माण करें, जिससे मेरी पूजा निर्विघ्न एवं एकाग्रतापूर्वक हो सके । मेरी आजकी पूजा एवं आरती आपके….
आश्रम जीवनका मुख्य उद्देश्य होता है साधना कर ईश्वरप्राप्ति करना ! हमारे मनीषियोंने जीवनकी चार अवस्थाओंको आश्रम बताकर यह सन्देश दिया कि जीवनके प्रत्येक….
यह तो सर्वविदित ही है कि हत्यासे पहले पशु, पक्षी, मछलियों आदिके स्वास्थ्यकी पूरी जांच नहीं की जाती है और उनके शरीरमें छुपे हुए रोगोंका पता नहीं लगाया जाता । अण्डे, पशु, पक्षी, मछलियां भी कैंसर, ट्यूमर आदि अनेक रोगोंसे ग्रस्त होते हैं और उनके मांसके सेवनसे वे रोग मनुष्यमें प्रवेश कर जाते हैं । […]
भोजन करनेसे पूर्व की जानेवाली प्रार्थना हे प्रभु, आपकी कृपाके कारण ही मुझे आपका यह महाप्रसादरूपी आहार मिला है, इस हेतु हम आपके कृतज्ञ हैं । इस महाप्रसादसे मेरे देहका पोषण हो एवं इसे ग्रहण करते समय मैं नामजप करते हुए कृतज्ञताके भावसे इसे ग्रहण कर सकूं, ऐसा मुझसे प्रयास होने दें ! इस महाप्रसादके […]
गृहस्थ-आश्रम (उत्तम गुणोंके आचरण और श्रेष्ठ पदार्थोंकी उन्नतिसे सन्तानों की उत्पत्ति और वानप्रस्थ आश्रम हेतु प्रवृत्त होनेके लिए सुखका उपभोग करते हुए साधनाके संस्कारको….
साधकोंने स्वभावदोष निर्मूलन क्यों करना चाहिए ?, इस सम्बन्धमें एक शास्त्र वचन इस प्रकार है – ‘बहूनपि गुणानेक दोषो ग्रसति’ अर्थात एक दोष बहुतसे गुणोंको भी नष्ट कर देता है । साधनाका संचय हो एवं गुण उभरकर आये, इस हेतु स्वभावदोष निर्मूलन अति आवश्यक है ! इसे एक उदाहरणसे समझ लेते हैं, एक व्यक्ति अपने […]
कुछ दिवस पूर्व एक व्यक्तिसे मेरी बातचीत हो रही थी ! वे ४० वर्षोंसे गायत्री साधना करते हैं और बाह्य रूपसे साधक होनेका पूर्ण दिखावा करते हैं । वे मुझसे कहने लगे इतने सारे दुर्जनों….
जब पशु पशुवधगृह (बूचडखानेमें) कसाईके द्वारा अपनी मृत्युको पास आते देखता है तो वह भय और आतंकसे कांप उठता है । मृत्युको समीप भांपकर वह एक-दो दिन पहलेसे ही खाना पीना छोड देता है….
वैदिक उपासनाके निर्माणाधीन आश्रमके सम्बन्धमें एक व्यक्तिसे मेरी चर्चा हो रही थी तो उन्होंने कहा कि आपको आश्रमके निर्माण कार्यके लिए धन चाहिए तो आप अपनी ब्रांडिंग कराएं….
ईश्वरको भोले एवं सरल हृदयवाले व्यक्ति प्रिय होते हैं । हम जितने नम्र और शरणागत रहते हैं, उतना ही अधिक उनका ध्यान हमपर रहता है । वैसे ही जैसे निर्बल चूजोंके (शावकोंके) प्रति चिडियाका अधिक ध्यान रहता है । जब चूजे स्वयं सिद्ध होकर अपना भोजन ढूंढने लगते हैं और उडने लगते हैं, तब चिडिया […]