अध्यात्म एवं साधना

भावजागृति हेतु किए जानेवाले प्रयास (भाग – ४)


योग्य साधनाके अभावमें एवं सामन्य व्यक्तिमें षड्रिपुओंका प्रमाण अधिक होनेके कारण एक बारमें उनकी प्रार्थना ईश्वरतक नहीं पहुंचती है; अतः प्रारंभिक अवस्थामें यदि साधककी प्रार्थना ईश्वरके चरणों तक नहीं पहुंचती है तो उन्हें निराश नहीं होना चाहिए….

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स्वाभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया कैसे करें ? (भाग – ३)


इस प्रक्रियाको करने हेतु प्रतिदिन अपनी चूकें (गलतियां) एक अभ्यासपुस्तिकामें लिखें एवं उसे समष्टिमें साझा करें । चूकें समष्टिमें साझा करने हेतु भिन्न वर्गके लोग निम्नलिखित प्रयत्न कर सकते हैं – * जैसे विद्यार्थी अपने विद्यालय या महाविद्यालयके कक्षमें चूक लिखनेवाला फलक (बोर्ड) रख सकते हैं । * गृहस्थ अपने घरपर सभी सदस्योंके चूक लिखने […]

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स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रियाको आरम्भ कैसे करें ? (भाग – २)


इस प्रक्रियाको करने हेतु प्रतिदिन अपनी चूकें (गलतियां) एक अभ्यासपुस्तिकामें लिखें, जो इस प्रक्रियाका प्रथम चरण है, तो आइए इससे क्या लाभ होता है ?, यह जान लेते हैं……

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स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया कैसे आरम्भ करें ? (भाग – १)


इस प्रक्रियाका शुभारम्भ करने हेतु सर्वप्रथम आपको यह स्वीकार करना होगा कि आपके व्यक्तित्वमें स्वाभावदोष हैं…..

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भावजागृति हेतु किए जानेवाले प्रयास (भाग – १)


प्रार्थना ईश्वरसे संवाद साधनेका है एक उत्तम साधन
माना तो देव नहीं तो पत्थर, जहां भाव वहीं देव, ऐसी कहावतें हम सबने सुनी है ।  आजसे हम प्रतिदिन भाव जागृति हेतु साधक क्या प्रयास कर सकते हैं…..

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सन्यासी क्यों करे स्वाभाव दोष निर्मूलन प्रक्रिया ? (भाग – २)


पूर्णत्वकी प्राप्ति हेतु करें यह प्रक्रिया संन्यास धारण करनेवाला जीव ईश्वरसे पूर्ण एकरूपताकी इच्छा रखता है; तभी वह मायाके सर्व बन्धनोंका परित्याग कर, एक चुनौतीपूर्ण मार्ग तब चुनता है, जब उसने ईश्वरको देखा या जाना नहीं होता है । इस व्रतको लेनेके पश्चात् वह पूर्ण उत्कंठासे साधना करता है, इसी क्रममें उसे अत्यन्त कष्ट या […]

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संन्यासी क्यों करे स्वाभाव दोष निर्मूलन प्रक्रिया ? (भाग – १)


आपको एक आनन्दकी बात बताती हूं, गुरुकृपासे हमारे लेखोंके वाचकोंमें विद्यार्थीसे लेकर अनेक गुरुओंके माननेवाले भक्त, साधक, सिद्ध, ब्रह्मचारी एवं अनेक संन्यासी भी सम्मिलित हैं; अतः लेखन करते  समय या सत्संग लेते समय मुझे सभी वर्गके पाठक या श्रोताका ध्यान रखना पडता है । यद्यपि स्थूलसे हम उनसे परिचित नहीं हैं, किन्तु सूक्ष्मसे उनका हमसे […]

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विद्यार्थियोंको क्यों सिखाया जाए स्वभावदोष निर्मूलन (भाग – २)


आजका विद्यार्थी ही कलका गृहस्थ बनता है । यदि ब्रह्मचर्य आश्रममें (विद्यार्थी जीवनमें) दोष निर्मूलन प्रक्रिया सिखाई जाए तो ऐसे विद्यार्थियोंका जीवन सुखी होगा और वे अच्छे नागरिक, अच्छे पति या पत्नी, माता या पिता, पुत्र या पुत्री सिद्ध होंगे । वर्तमान कालमें अधिकांश युवक या युवती जैसे ही वैवाहिक जीवनमें प्रवेश करते हैं, उनमें […]

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विद्यार्थियोंको क्यों सिखाया जाए स्वभावदोष निर्मूलन (भाग-१)


बाल्यकालसे दोषोंका निर्मूलन नहीं सिखानेके कारण ही आजका युवा वर्ग है दिशाहीन एक सर्वेक्षण अनुसार देशमें होनेवाले ७० % अपराधोंमें युवाओंके संलिप्तता रहती है । बाल्यकालसे ही विद्यार्थियोंको अपने दोषोंके प्रति सतर्क रहना, अपनी चूकोंको स्वीकार करना, अपनी तमोगुणी वृत्तिको नियन्त्रित करना, यह सब सिखाया नहीं जाता, इसके विपरीत उसे भोगकी ओर प्रवृत्त किया जाता […]

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साधक क्यों करे स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया ? (भाग – १३)


निर्विकल्प साधना करने हेतु एवं साधनाके मध्य बार-बार आनेवाले विकल्पोंके निर्मूलन हेतु करें अहम् और दोषोंके निर्मूलन प्रक्रिया अनेक साधक साधना तो करना चाहते हैं, किन्तु अस्थिर वृत्तिके कारण वे साधनामें सातत्य नहीं रख पाते हैं । जैसे उपासनाके मार्गदर्शनमें कुछ ऐसे साधक साधनारत हैं, जो साधना करना चाहते हैं, किन्तु अपने अस्थिर वृत्तिके कारण […]

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