आज सभीको सर्वत्र वायु, ध्वनि, जल इत्यादि प्रदूषण दिखाई देता है, किन्तु ये तो मनुष्यके स्वार्थी वृत्तिके कारण होनेवाले मात्र स्थूल स्तरके प्रदूषण हैं । समाजद्वारा धर्माचरण एवं साधना न करनेके कारण……
ईश्वरका नाम मोक्षप्राप्तिका सर्वश्रेष्ठ साधन है, रत्नाकर दस्यु इसी नामके प्रभावसे वाल्मीकि ऋषि बनें । इस सृष्टिके इतिहासमें ऐसे अनेक भक्त हुए हैं, जो नामस्मरण कर इस भवसागरको पार कर गए….
कलियुगमें दोष और अहंके संस्कार अधिक होनेके कारण सामान्य मनुष्योंकी वृत्ति बहिर्मुख होती है और ऐसी वृत्तिके लोगोंका विवेक जागृत नहीं होता; फलस्वरूप ध्यान योग, ज्ञान योग या कर्म योग इत्यादिकी साधना करना उनके……
जब कुछ लोगोंको नामजप करनेके लिए कहा जाता है तो वे कहते हैं पहले अपनी सभी उत्तरदायित्वसे निवृत हो लें उसके पश्चात नामजप करेंगे । ऐसे सभी लोगोंको बता दें कि आप मायासे यदि निवृत होना……
कलियुगके इस चरमकालमें देसी गायका घी, समिधा हेतु सभी सात्त्विक सामग्रीकी न्यूनता तथा योग्य प्रकारसे वैदिक मन्त्रोच्चारण न आनेके कारण, यज्ञ करना आज अनेक लोगोंके लिए कठिन होता जा रहा है…..
मनका मुख्य कार्य विचार करना है, वस्तुत: मनकी परिभाषा ही है कि वह विचारोंका एक पुंज है; अतः उसका अपनी प्रकृति अनुरूप वर्तन करना स्वाभाविक है । मनको हम विषयके किसी भी भोगमें अधिक समयतक स्थिर नहीं कर सकते…..
ख्रिस्ताब्द २००० में एक मन्दिरमें वृद्ध स्त्रियोंकी भजन मण्डलीमें प्रवचन हेतु गई थी । वहां भजनके पश्चात स्त्रियां रामनामका जप १०८ बार कर रही थी; किन्तु उस जपमें माधुर्य, भक्ति एवं भाव कुछ भी नहीं था, भजन समाप्त हो चूका था…..
प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनको सुखी करने हेतु व्यावहारिक स्तरपर अनेक प्रयत्न करता है । इस हेतु वह धनार्जन कर उसे रखता है, अपने जीवनमें यथाशक्ति सुख-सुविधाओंकी व्यवस्था करता है, विपत्तिमें भी उसे कष्ट न हो इस हेतु अनेक….
कुछ साधक ‘वैदिक उपासना पीठ’के आश्रममें आनेके पश्चात हमें भगवद्गगीता सिखानेका आग्रह करते हैं । गीता सीखने हेतु कुछ आवश्यक गुण होने चाहिए, जिसमें प्रथम गुण है, हमारी वृत्तिका मूलतः सात्त्विक होना एवं बुद्धिका तीक्ष्ण होते हुए विवेकका जागृत होना । वह भगवानके श्रीमुखसे निकला हुआ वेदवचन है । यदि हमारी वृत्ति तमोगुणी हो तो हम […]
चारों पुरुषार्थोंंकी प्राप्ति कैसे कर सकते हैं ?, पूर्वकालमें इस हेतु सभी प्रयत्नशील रहते थे । कलियुगी जीवके लिए अर्थ और कामकी प्राप्ति प्रधान होती है, ऐसेमें ईश्वरप्राप्ति हेतु प्रयत्न करनेके लिए…..