अध्यात्म एवं साधना

क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – २१)


आज सभीको सर्वत्र वायु, ध्वनि, जल इत्यादि प्रदूषण दिखाई देता है, किन्तु ये तो मनुष्यके स्वार्थी वृत्तिके कारण होनेवाले मात्र स्थूल स्तरके प्रदूषण हैं । समाजद्वारा धर्माचरण एवं साधना न करनेके कारण……

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – २०)


ईश्वरका नाम मोक्षप्राप्तिका सर्वश्रेष्ठ साधन है, रत्नाकर दस्यु इसी नामके प्रभावसे वाल्मीकि ऋषि बनें । इस सृष्टिके इतिहासमें ऐसे अनेक भक्त हुए हैं, जो नामस्मरण कर इस भवसागरको पार कर गए….

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १९)


कलियुगमें दोष और अहंके संस्कार अधिक होनेके कारण सामान्य मनुष्योंकी वृत्ति बहिर्मुख होती है और ऐसी वृत्तिके लोगोंका विवेक जागृत नहीं होता; फलस्वरूप ध्यान योग, ज्ञान योग या कर्म योग इत्यादिकी साधना करना उनके……

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १८)


जब कुछ लोगोंको नामजप करनेके लिए कहा जाता है तो वे कहते हैं पहले अपनी सभी उत्तरदायित्वसे निवृत हो लें उसके पश्चात नामजप करेंगे । ऐसे सभी लोगोंको बता दें कि आप मायासे यदि निवृत होना……

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १७)


कलियुगके इस चरमकालमें देसी गायका घी, समिधा हेतु सभी सात्त्विक सामग्रीकी न्यूनता तथा योग्य प्रकारसे वैदिक मन्त्रोच्चारण न आनेके कारण, यज्ञ करना आज अनेक लोगोंके लिए कठिन होता जा रहा है…..

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १५)


मनका मुख्य कार्य विचार करना है, वस्तुत: मनकी परिभाषा ही है कि वह विचारोंका एक पुंज है; अतः उसका अपनी प्रकृति अनुरूप वर्तन करना स्वाभाविक है । मनको हम विषयके किसी भी भोगमें अधिक समयतक स्थिर नहीं कर सकते…..

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आध्यात्मिक प्रगति हेतु ईश्वरका नाम भावपूर्ण लेनेकी आवश्यकता


ख्रिस्ताब्द २००० में एक मन्दिरमें वृद्ध स्त्रियोंकी भजन मण्डलीमें प्रवचन हेतु गई थी । वहां भजनके पश्चात स्त्रियां रामनामका जप १०८ बार कर रही थी; किन्तु उस जपमें माधुर्य, भक्ति एवं भाव कुछ भी नहीं था, भजन समाप्त हो चूका था…..

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १४)


प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनको सुखी करने हेतु व्यावहारिक स्तरपर अनेक प्रयत्न करता है । इस हेतु वह धनार्जन कर उसे रखता है, अपने जीवनमें यथाशक्ति सुख-सुविधाओंकी व्यवस्था करता है, विपत्तिमें भी उसे कष्ट न हो इस हेतु अनेक….

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गीता सीखने हेतु योग्य आध्यात्मिक स्तरकी आवश्यकता है !


कुछ साधक ‘वैदिक उपासना पीठ’के आश्रममें आनेके पश्चात हमें भगवद्गगीता सिखानेका आग्रह करते हैं । गीता सीखने हेतु कुछ आवश्यक गुण होने चाहिए, जिसमें प्रथम गुण है, हमारी वृत्तिका मूलतः सात्त्विक होना एवं बुद्धिका तीक्ष्ण होते हुए विवेकका जागृत होना । वह भगवानके श्रीमुखसे निकला हुआ वेदवचन है । यदि हमारी वृत्ति तमोगुणी हो तो हम […]

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क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – १३)


चारों पुरुषार्थोंंकी प्राप्ति कैसे कर सकते हैं ?, पूर्वकालमें इस हेतु सभी प्रयत्नशील रहते थे । कलियुगी जीवके लिए अर्थ और कामकी प्राप्ति प्रधान होती है, ऐसेमें ईश्वरप्राप्ति हेतु प्रयत्न करनेके लिए…..

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