अ. वर्तमान कालमें नामजप योग्य साधना है क्योंकि कलियुगमें कर्मकांड हेतु अनेक बार सात्त्विक सामग्री नहीं मिल पाती है। जैसे पूजा हेतु मात्र देसी गायके घीका ही उपयोग होना चाहिए विदेशी गायके घीसे या भैंसके घीका दीप जलानेसे आसुरी शक्तियां आकृष्ट होती हैं इसलिए वर्तमान कालमें पूजाका यथोचित लाभ नहीं मिलता, यह तो मात्र मैंने […]
अ. स्नान एवं वास्तु-शुद्धिके पश्चात् नित्य पूजा अवश्य करें। चाहे आप किसी भी योगमार्गसे साधना कर रहे हों, किन्तु जिस ईश्वरने इस ब्रह्माण्डका सृजन कर, उसे सुचारू रूपसे चलाने हेतु देवताओंको कार्यभार सौंपा है, उनके प्रति अपनी दिनचर्याके मध्य कृतज्ञता व्यक्त करना न भूलें। पंचोपचारसे अपने पूजाघरमें नित्य पूजन कर, देवताओंके प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य […]
अ. हमारी विचारप्रक्रिया सात्त्विक हो तथा विवेक जागृत रहे इस हेतु हम जिस वास्तुमें रहते हैं, उसका सात्त्विक होना भी अति आवश्यक होता है । इसीलिए प्रतिदिन स्नानके पश्चात् सात्त्विक वस्त्र एवं तिलक धारण कर वास्तु शुद्धि अवश्य करनी चाहिए । वर्तमान कालमें अधिकांश घर, वास्तुशास्त्र अनुसार नहीं बने होते हैं, धर्माचरण एवं योग्य साधनाके […]
अ. स्नानके पश्चात् वस्त्र धारण कर सर्वप्रथम स्त्री और पुरुष दोनोंने ही तिलक (स्त्रियोंके टीका) धारण करना चाहिए। हमारे दोनों भोहोंके मध्यमें आज्ञा चक्र होता है, इस चक्रमें सूक्ष्म द्वार होता है जिससे इष्ट और अनिष्ट दोनों ही शक्ति प्रवेश कर सकती है, यदि इस सूक्ष्म प्रवेश द्वारको हम सात्त्विक पदार्थका लेप एक विशेष रूपमें […]
अ. घरके नलके जलसे स्नान करनेकी अपेक्षा नैसर्गिक जलस्रोतमें स्नान करना आध्यात्मिक दृष्टिसे अधिक पोषक होता है अतः हमारी संस्कृतिमें घर-घरमें कुआं हुआ करता था या प्रत्येक ग्राममें तडाग (तालाब) हुआ करता था जहां सभी आनन्दपूर्वक स्नान किया करते थे। आजके समयमें यदि यह सम्भव न हो तो जब भी समय मिले तो कुंआ, तडाग, […]
अ. स्नान करते समय रासायनिक साबुनका (वर्तमान कालके केमिकल साबुन) उपयोग करना टालना चाहिए । रासायनिक साबुन मूलत: तमोगुणी होते हैं अतएव उससे स्नान करनेसे, सात्त्विकतामें वृद्धि नहीं होती है, इसके विपरीत तमोगुणका आवरण सम्पूर्ण देहपर निर्माण होता है, इससे तो अच्छा है कि मात्र सामान्य जलसे स्नान कर लिया जाए। स्नान करते समय आयुर्वेदिक […]
अ. नित्य कर्मसे निवृत्त होकर सूर्योदयसे पूर्व स्नान करना, वह भी शीतल जलसे उत्तम होता है, इससे कुछ कालके (२० मिनिटके) लिए सात्त्विकतामें वृद्धि होती है इसीलिए स्नानके पश्चात् हमें अच्छा लगता है या स्फूर्ति मिलती है। उष्ण (गरम) जलकी अपेक्षा शीतल जलसे स्नान करनेसे हमें अधिक प्रमाणमें आध्यात्मिक लाभ मिलता है क्योंकि शीतल जलमें […]
अ. व्यायाम या योगासन एवं प्राणायाम करते समय आजकल अनेक लोग काले पाश्चत्य वस्त्र पहनते हैं, ऐसा करनेसे हमारे शरीरकी कोशिकाओंमें स्थित सूक्ष्म काली शक्तिके विघटनको काले वस्त्र, तमोगुणी होनेके कारण अवरुद्ध करता है; फलस्वरूप इन्हें करनेके पश्चात् हमें शारीरिक लाभके साथ ही अपेक्षित आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता। हिन्दू धर्म प्रत्येक कृतिको करते समय उसका […]
अ. प्रातःकाल उठनेके पश्चात् नियमित अपनी प्रकृति एवं आयु अनुरूप व्यायाम या योगासन एवं प्राणायाम करें ! वैज्ञानिक सुख-संसाधनोंने आजकल लोगोंको अतिशय आलसी बना दिया है एवं लोगोंकी शारीरिक क्षमता दिन-प्रति-दिन घटती जा रही है एवं शारीरिक श्रमके अभावमें अनेक शारीरिक रोग, महामारी समान समाजमें फैल रहे हैं । अपनी शारीरिक क्षमताको बढाने हेतु या […]
अ. बिना कुल्ला किए अपने बिछावनपर चाय (बेड टी) न लें । सम्पूर्ण रात्रि जो भी थूकके रूपमें तमोगुण मुखमें एकत्रित होता है, वह चायके माध्यमसे पेटमें चला जाता है और इससे शारीरिक व्याधि होनेकी आशंका तो बढती ही हैं साथ ही हमारी वृत्ति तमोगुणी बनती है । साथ ही प्रातःकालके आहारका शुभारम्भ चायसे करना, […]